अदालत का बड़ा फैसलाः पूर्व प्रधानमंत्री को फांसी की सजा, अटॉर्नी जनरल बोले- मारे गए लोगों को न्याय मिला

Major court decision: Former Prime Minister sentenced to death, Attorney General says – those killed got justice

अदालत का बड़ा फैसलाः  17 नवंबर 2025: बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल अदालत ने सोमवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों (crimes against humanity) में दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

 

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अदालत ने हसीना के साथ-साथ उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी इसी मामले में मृत्युदंड दिया है।

एक अन्य आरोपी, पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून, जिन्होंने हसीना के खिलाफ गवाही दी थी, उन्हें पांच वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई है।

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फैसले का आधार और आरोप

ट्रिब्यूनल ने यह माना है कि 2024 में हुए छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन (जिसे ‘जुलाई विद्रोह’ कहा जाता है) के दौरान हसीना ने ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के उपयोग के आदेश दिए थे

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अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि हिंसात्मक दमन में कम-से-कम 1,400 लोग मारे गए थे, और पिछले महीनों की सुनवाई में उन्होंने मृत्युदंड की मांग की थी

 

अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने कहा कि हसीना “मुख्य योजनाकार” थीं और इसीलिए उन्हें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।

प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल

हसीना और खान दोनों ही मुकदमे के समय देश के बाहर — भारत में निर्वासन में थे।

 

उनके समर्थकों ने ट्रिब्यूनल पर राजनीतिक प्रेरित न्यायालय होने का आरोप लगाया है

 

फैसले से पहले और बाद में ढाका और अन्य हिस्सों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।

 

हसीना की पार्टी, अवामी लीग, ने फैसले का विरोध करते हुए देशव्यापी बंद (शटडाउन) की घोषणा की है।

 

यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। हसीना की 15-वर्षीय सत्ता समाप्ति के बाद यह मुकदमा और सज़ा देश में राजनीतिक अस्थिरता और विभाजन को और बढ़ा सकती है। अंतरिम सरकार के लिए यह न्याय की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग हो सकता है, जबकि हसीना समर्थक इसे असंवैधानिक और राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहे हैं।

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