Faheem Khan Case: फहीम खान की रिहाई पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश! सरकार को 8 हफ्ते की मोहलत, पालन नहीं हुआ तो अफसरों को खुद होना पड़ेगा पेश
धनबाद के वासेपुर निवासी फहीम खान की समयपूर्व रिहाई से जुड़ा मामला; पिछली सुनवाई में सरकार पर लगा था 1 हजार रुपये का जुर्माना, अब 8 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

रांची: धनबाद के वासेपुर निवासी फहीम खान की समयपूर्व रिहाई के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि निर्धारित समयसीमा में पूर्व के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों और प्रतिवादियों को कोर्ट में सशरीर उपस्थित होना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका का हवाला देकर मांगा अतिरिक्त समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसी आधार पर सरकार ने आदेश के अनुपालन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा।
अदालत ने सरकार की मांग स्वीकार करते हुए समय दे दिया, लेकिन साथ ही आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित प्रतिवादियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की चेतावनी भी दी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने पक्ष रखा।
पिछली सुनवाई में सरकार पर लगा था जुर्माना
इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से समय मांगे जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। अदालत ने सरकार पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था और यह राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) में जमा करने का निर्देश दिया था।
दरअसल, फहीम खान की आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वर्ष 1984 की नीति के आधार पर उनकी समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए अदालत ने छह सप्ताह की समयसीमा तय की थी।
आदेश का पालन नहीं होने पर फहीम खान की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई।
20 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं फहीम खान
फहीम खान को वर्ष 2009 में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह वास्तविक सजा और रिमिशन मिलाकर 20 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।
उन्होंने समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने वर्ष 2007 की नीति के आधार पर उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अब 8 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट से आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मिलने के बाद अब राज्य सरकार को निर्धारित अवधि में आदेश के अनुपालन की दिशा में कदम उठाना होगा। अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी। इस मामले में अदालत के निर्देश के बाद सरकार क्या निर्णय लेती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।












