झारखंड : चर्चों की संख्या पर चंपाई सोरेन का सवाल, झारखंड में आदिवासी पहचान और डीलिस्टिंग पर फिर गरमाई सियासत
Champai Soren Questions the Number of Churches; Politics Heats Up Again in Jharkhand Over Tribal Identity and Delisting.


झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य में चर्चों की बढ़ती संख्या और आदिवासी धार्मिक पहचान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाते हुए कहा कि जब आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है, तो झारखंड में 5 हजार से अधिक चर्च क्यों बनाए गए हैं।
चंपाई सोरेन के सवाल से बढ़ी राजनीतिक बहस
अपने पोस्ट में चंपाई सोरेन ने यह भी पूछा कि क्या इन चर्चों में मरांग बुरु और सिंगबोंगा की पूजा होती है। उनके इस बयान के बाद राज्य में डीलिस्टिंग और आदिवासी पहचान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
चंपाई सोरेन लंबे समय से डीलिस्टिंग की मांग उठाते रहे हैं और आदिवासी परंपराओं की सुरक्षा को लेकर मुखर रहे हैं।
भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भाजपा का कहना है कि सरना और सनातन परंपरा एक ही मूल आस्था से जुड़ी हैं, जबकि कांग्रेस का तर्क है कि सरना और सनातन दो अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं।
पहचान और आस्था पर नई सियासी बहस
चंपाई सोरेन के ताजा बयान के बाद झारखंड में एक बार फिर आदिवासी पहचान, धार्मिक परंपरा और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं, जिससे बहस और तेज होने की संभावना है।