झारखंड : HEC पर ESI बकाया का संकट…कर्मचारियों की सैलरी अटकी…इलाज भी ठप..कंपनी डिफॉल्टर घोषित, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
Crisis over Pending ESI Dues at HEC: Employees' Salaries Stalled, Medical Treatment Halted; Company Declared a Defaulter, Warned of Legal Action.

Heavy Engineering Corporation Limited एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। कर्मचारी राज्य बीमा से जुड़ी अनियमितताओं के चलते ESI विभाग ने कंपनी को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि जल्द बकाया राशि जमा नहीं की गई, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डिप्टी डायरेक्टर स्तर से प्रबंधन को तत्काल भुगतान और सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
26 महीनों से वेतन संकट, हालात बदहाल
कंपनी के कर्मचारियों की स्थिति पहले से ही बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लगभग दो साल से अधिक समय से नियमित वेतन नहीं मिल पा रहा है। कभी दो महीने तो कभी तीन महीने के अंतराल में भुगतान होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। दैनिक जरूरतों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च भी प्रभावित हो रहे हैं।
अस्थायी कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा मार
करीब 500 अस्थायी कर्मियों के सामने स्थिति और भी गंभीर है। उनके वेतन से हर महीने ESI के नाम पर कटौती तो की जा रही है, लेकिन यह राशि संबंधित खाते में जमा नहीं हो रही। इसका सीधा असर यह हुआ है कि पिछले कई महीनों से उन्हें चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अस्पतालों में नहीं मिल रहा इलाज
कर्मचारियों का कहना है कि जब वे ESI अस्पताल पहुंचते हैं, तो रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ रहे हैं। उनका आरोप है कि कटौती के बावजूद सुविधा न मिलना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
परिवार पर भी पड़ रहा असर
बीमारी की स्थिति में हालात और गंभीर हो जाते हैं। आर्थिक तंगी के कारण निजी अस्पताल का खर्च उठाना संभव नहीं है। कई कर्मचारी इलाज टालने को मजबूर हैं, जबकि कुछ कर्ज लेकर दवाइयों का इंतजाम कर रहे हैं। इसका असर पूरे परिवार के जीवन स्तर पर पड़ रहा है।
जांच शुरू, जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
अब कंपनी स्तर पर यह जांच शुरू हो गई है कि ESI के नाम पर काटी गई राशि जमा क्यों नहीं हुई। यह भी खंगाला जा रहा है कि भुगतान मिलने के बाद किन एजेंसियों या संवेदकों ने रकम जमा नहीं की। सालवार डेटा तैयार कर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
आंदोलन की चेतावनी, जल्द समाधान की मांग
अस्थायी कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं और अब धैर्य जवाब दे रहा है।
ESI विभाग का सख्त रुख
ESI विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रबंधन से पूरी जानकारी मांगी गई है, ताकि जल्द से जल्द स्थिति सुधारकर कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल की जा सकें।












