बंदूक, पिस्टल और राइफल का लाइसेंस कैसे मिलता है? जानिए नियम, फीस और पूरी प्रक्रिया

आमतौर पर बंदूक, पिस्टल, राइफल या दुनाली जैसे हथियार पुलिस, सेना और सुरक्षा बलों के पास नजर आते हैं। हालांकि, भारत में कुछ परिस्थितियों में आम नागरिक भी कानूनी तौर पर हथियार रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत हथियार का लाइसेंस लेना जरूरी होता है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में लाइसेंस के नवीनीकरण या ट्रांसफर के लिए अब 1,000 रुपये अतिरिक्त फीस देनी होगी। सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आम नागरिक को हथियार का लाइसेंस कैसे मिलता है? इसके लिए कौन-कौन से नियम हैं और लाइसेंस मिलने के बाद किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है?
बिना लाइसेंस हथियार रखना अपराध
भारत में हथियार रखने और उनके लाइसेंस से जुड़े नियम शस्त्र अधिनियम, 1959 (Arms Act, 1959) और शस्त्र नियम, 2016 (Arms Rules, 2016) के तहत निर्धारित हैं।
किसी व्यक्ति को लाइसेंस के बिना ऐसा हथियार रखने की अनुमति नहीं है जिसके लिए लाइसेंस अनिवार्य है। लाइसेंस जारी करने से पहले संबंधित अधिकारी आवेदक की पात्रता और अन्य निर्धारित शर्तों की जांच करते हैं।
कौन ले सकता है हथियार का लाइसेंस?
हथियार का लाइसेंस हर व्यक्ति को केवल मांगने पर नहीं मिल जाता। आवेदक को निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं। आवेदन पर संबंधित प्राधिकरण आवेदक की पृष्ठभूमि और लाइसेंस की जरूरत से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकता है।
लाइसेंस देने का फैसला संबंधित प्राधिकरण द्वारा लागू कानून और नियमों के आधार पर किया जाता है।
लाइसेंस लेने की प्रक्रिया क्या है?
आमतौर पर आवेदक को निर्धारित आवेदन प्रक्रिया के जरिए लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद संबंधित विभाग और पुलिस द्वारा जरूरी सत्यापन किया जाता है।
आवेदक की पहचान, पते और अन्य आवश्यक जानकारियों की जांच की जा सकती है। सत्यापन और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकरण लाइसेंस देने या आवेदन को अस्वीकार करने का निर्णय लेता है।
लाइसेंस मिलने के बाद भी नियम जरूरी
हथियार का लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि हथियार रखने या इस्तेमाल करने की पूरी छूट मिल गई। लाइसेंसधारी को लाइसेंस में दर्ज शर्तों और लागू कानूनों का पालन करना होता है।
हथियार की खरीद, उसका रखरखाव, परिवहन और इस्तेमाल सभी निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए। नियमों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस पर कार्रवाई हो सकती है और कानूनी जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।
लाइसेंस की फीस कितनी होती है?
हथियार के लाइसेंस की फीस हथियार की श्रेणी, लाइसेंस के प्रकार और लागू सरकारी नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा लाइसेंस के नवीनीकरण या ट्रांसफर के लिए भी निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है।
इसलिए किसी भी आवेदन से पहले संबंधित राज्य या जिला प्रशासन की वर्तमान फीस और नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
सबसे जरूरी बात
हथियार का लाइसेंस सुरक्षा की जरूरत या अन्य वैध कारणों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत प्राप्त किया जाता है। बिना लाइसेंस हथियार रखना या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करना गंभीर कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है।
इसलिए हथियार खरीदने या लाइसेंस के लिए आवेदन करने से पहले शस्त्र अधिनियम, 1959 और शस्त्र नियम, 2016 के मौजूदा प्रावधानों तथा अपने क्षेत्र के सक्षम प्राधिकरण के नियमों की जानकारी जरूर लें।












