रांची: राज हॉस्पीटल में जमकर हंगामा, पैर फ्रैक्चर का मरीज डेढ़ महीने में भी नहीं हो सका ठीक, पैर का इंफेक्शन पहुंच गया माथे में, 16 लाख का बिल भी थमाया, पुलिस पहुंची मौके पर…

Ranchi: Chaos erupted at Raj Hospital; a patient with a fractured leg failed to recover even after a month and a half, the leg infection spread to his forehead, and he was handed a bill of ₹16 lakh; the police arrived at the scene...

रांची। राजधानी रांची के राज हॉस्पिटल में जमकर हंगामा हुआ। 18 वर्षीय मरीज राजू कुमार के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए खूब बबाल काटा। विवाद गहराता देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

 

पैर के फ्रैक्चर के इलाज के लिए कराया था भर्ती

परिजनों के अनुसार, राजू कुमार का पैर टूट गया था, जिसके बाद उसे मई 2026 में इलाज के लिए राज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि पैर की चोट के इलाज के दौरान संक्रमण (इन्फेक्शन) बढ़ता गया और बाद में इसका असर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच गया। उनका दावा है कि अस्पताल प्रबंधन इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा है कि संक्रमण कैसे गंभीर हो गया।

 

16 लाख रुपये का बिल, फिर भी हालत गंभीर

परिजनों का कहना है कि राजू पिछले कई महीनों से अस्पताल में भर्ती है और अब तक अस्पताल की ओर से करीब 16 लाख रुपये का बिल बनाया जा चुका है।आरोप है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद मरीज की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। फिलहाल राजू कुमार वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

 

बिगड़ी हालत तो दूसरे अस्पताल रेफर करने की बात

परिजनों ने आरोप लगाया कि जब मरीज की हालत अधिक गंभीर हो गई तो अस्पताल प्रबंधन ने उसे दूसरे अस्पताल रेफर करने की बात कही।इसी बात से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

 

मौके पर पहुंची पुलिस

हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। पुलिस ने परिजनों को शांत कराया और पूरे मामले की जानकारी जुटाई।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।खबर लिखे जाने तक राज हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अस्पताल का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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