झारखंड: “…पर मौत बुला रही थी तो क्या कोई करता” एयर एंबुलेंस में ना तो ड्यूटी थी, ना जाना जरूरी था, बस दोस्ती की खातिर दिल्ली जाने को डॉ विकास हुए थे तैयार, पत्नी है SBI में अफसर…

Jharkhand: "...but what could anyone do if death was calling?" There was no duty in the air ambulance, nor was it necessary to go, Dr. Vikas was ready to go to Delhi just for the sake of friendship, his wife is an officer in SBI...

रांची। ….वो कहते हैं ना होनी को कौन टाल सकता है..कुछ वैसा ही हुआ था चतरा विमान हादसे में जान गंवाने वाले डाक्टर विकास कुमार गुप्ता के साथ। डॉ विकास को दिल्ली नहीं जाना था, लेकिन ऐन मौके पर साथी डाक्टर ने जाने से इंकार कर दिया।

जिसके बाद डॉ विकास से सभी ने दिल्ली चलने का आग्रह किया। फिर उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद विमान क्रैश हो गया। चतरा में एयर एंबुलेंस के क्रैश होने से मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी, पायलट, को-पायलट के साथ युवा चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता की भी मौत हो गई।

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इस घटना ने न केवल चिकित्सा जगत, बल्कि आम लोगों को भी गहरे दुख में डुबो दिया है। डॉ. विकास कुमार गुप्ता का जीवन संघर्ष, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल रहा। बिहार के औरंगाबाद जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे डॉ. विकास ने वर्ष 2003 बैच में ओडिशा के कटक से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की थी। वर्ष 2015 से वे झारखंड राज्य चिकित्सा सेवा में मेडिकल अफसर के रूप में कार्यरत थे।

वर्तमान में उनकी पोस्टिंग रांची सदर अस्पताल में थी। इससे पहले उन्होंने लातेहार के महुआटांड़, चंदवा और रांची के नामकुम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपनी सेवाएं दी थीं। रांची सदर अस्पताल के लेबर रूम और ओटी इंचार्ज, एनेस्थेटिक विशेषज्ञ डॉ. स्टीफन खेस ने डॉ. विकास के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि डॉ. विकास न केवल एक कुशल चिकित्सक थे, बल्कि एक उत्कृष्ट सहयोगी भी थे।

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डॉ. खेस के अनुसार, हादसे वाली रात डॉ. विकास की ड्यूटी पूरी हो चुकी थी और वे मरीज के साथ दिल्ली जाने को लेकर प्रारंभ में इच्छुक नहीं थे।बताया जा रहा है कि जिस चिकित्सक को पहले एयर एंबुलेंस के साथ जाना था, उसकी असमर्थता के बाद मरीज के परिजनों ने डॉ. विकास से आग्रह किया।

पूर्व में लातेहार के चंदवा में पोस्टिंग के दौरान मरीज और उनके परिवार से बने मानवीय रिश्तों के कारण वे अंततः दिल्ली जाने को तैयार हो गए। यह निर्णय उनकी संवेदनशीलता और मरीजों के प्रति समर्पण को दर्शाता है। डॉ. स्टीफन खेस ने बताया कि डॉ. विकास ने एमबीबीएस के बाद रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) से एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

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क्रिटिकल केयर में उनका अनुभव और शांत, सहज व्यवहार उन्हें मरीजों और सहकर्मियों के बीच अत्यंत प्रिय बनाता था। उन्हें एक “डाउन टू अर्थ” डॉक्टर के रूप में जाना जाता था, जो हर परिस्थिति में मरीजों के जीवन की रक्षा को प्राथमिकता देते थे।परिवार के लिए यह क्षति असहनीय है। उनकी पत्नी रांची में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक शाखा में अधिकारी हैं, जबकि उनका सात वर्षीय पुत्र अब पिता के साये से वंचित हो गया है।

डॉ. विकास के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम चतरा में ही किया गया, जिसके बाद परिजनों की इच्छा के अनुरूप शव को उनके पैतृक गांव, बिहार के औरंगाबाद भेज दिया गया। रांची सदर अस्पताल में उनकी स्मृति में शोकसभा आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।इस दुखद घटना पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और झारखंड हेल्थ सर्विसेस एसोसिएशन (झासा) ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है।

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