झारखंड: राज्यसभा चुनाव में झामुमो की चुप्पी ने कांग्रेस की बढ़ाई धड़कन, ये तीन दावेदार बढ़ा रहे हैं दवाब

रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव में गठबंधन का पेंच एक बार फिर फंसता दिख रहा है। गठबंधन को लेकर जो समीकरण सामने आ रहे हैं, उससे कांग्रेस की चिंता थोड़ी बढ़ती दिख रही है। कई दौर की बैठकों के बाद भी कांग्रेस के प्रत्याशी को लेकर झामुमो ने अब तक हामी नहीं भरी है।
हालांकि झामुमो के एक प्रत्याशी की जीत तो सुनिश्चित है। झारखंड विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार, राज्यसभा की एक सीट पर सीधे जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कुल 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है। इस समय कांग्रेस के पास अपने केवल 16 विधायक हैं।
ऐसे में कांग्रेस को अपने उम्मीदवार की वैतरणी पार लगाने के लिए पूरी तरह से सहयोगी दलों- जेएमएम, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भाकपा माले (CPIML) के वोटों की सख्त जरूरत है. महागठबंधन को लेकर राज्यसभा के आंकड़ों को देखें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 34 विधायक (यानी जेएमएम को अपने एक उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी 28 वोटों के बाद भी उसके पास 6 अतिरिक्त (Surplus) वोट बच रहे हैं)।
वहीं, कांग्रेस के 16 विधायक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) 04 विधायक और भाकपा माले (CPIML) के 02 विधायक हैं। यदि जेएमएम अपने वोट कांग्रेस को देती है और आरजेडी 4 एवं माले 2 के विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में मतदान करते हैं, तो कांग्रेस का कुल आंकड़ा (16 + 6 + 4 + 2 = 28) बिल्कुल जीत के आंकड़े तक पहुंच जाएगा।
राज्यसभा के संकट को सुलझाने के लिए कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क विशेष रूप से रांची में डेरा डाले हुए हैं। इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर मुलाकात कर लंबी चर्चा की है, लेकिन सीटों के दावों को लेकर गतिरोध अभी भी बरकरार है।
जीत के लिए चाहिए 28 वोट, कांग्रेस के पास केवल 16
कांग्रेस अपने स्तर पर वोटों का जुगाड़ करने के लिए गठबंधन के अन्य सहयोगियों पर डोरे डाल रही है. इसी सिलसिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य से भी सीधा संपर्क साधा है, ताकि उनके विधायकों का समर्थन हासिल किया जा सके।
कांग्रेस के भीतर भी टिकट के लिए अंतर्कलह तेज
एक तरफ जहां जेएमएम के साथ गठबंधन का पेंच फंसा है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के भीतर भी इस इकलौती संभावित सीट के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त तैयार हो गई है। कांग्रेस के भीतर इस समय मुख्य रूप से तीन कद्दावर नेताओं- पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू और वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी की ओर से मजबूत दावेदारी पेश की जा रही है। तीनों गुटों के नेता आलाकमान पर टिकट के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं, जिससे प्रदेश कमान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।









