LPG Crisis: पाकिस्तान में गैस सिलेंडर के लिए मचा हाहाकार, 12 किलो LPG के दाम 7,000 रुपये पहुंचे; महंगाई से परेशान परिवारों ने घटाया खाना
ईरान के साथ सीमा पर आवाजाही बंद होने से पाकिस्तान में LPG की सप्लाई प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 किलो के सिलेंडर की कीमत में 56 प्रतिशत तक उछाल आया है। इसका असर खासतौर पर लाहौर के रिक्शा चालकों और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच अब रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश में LPG सिलेंडर की कीमत बढ़कर करीब 7,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंचने की खबर है। गैस महंगी होने और सप्लाई प्रभावित होने से गरीब परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि कुछ परिवारों को अपने खाने में भी कटौती करनी पड़ रही है।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर लाहौर जैसे शहरों में दिखाई दे रहा है, जहां बड़ी संख्या में मोटराइज्ड रिक्शा LPG से चलते हैं। गैस महंगी होने से रिक्शा चालकों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है। उनके सामने एक तरफ वाहन चलाने का खर्च बढ़ गया है, तो दूसरी तरफ परिवार का राशन जुटाना भी चुनौती बनता जा रहा है।
ईरान बॉर्डर बंद होने से LPG सप्लाई पर असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर आवाजाही बंद होने से LPG से भरे टैंकर और अन्य सामान लेकर आने वाले ट्रक प्रभावित हुए हैं। इससे पाकिस्तान में गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि सीमा पर दो प्रमुख क्रॉसिंग बंद होने के बाद LPG का आयात प्रभावित हुआ और बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं।
पाकिस्तान LPG एसोसिएशन के मुताबिक, पहले ईरान से रोजाना करीब 7,000 मीट्रिक टन LPG पाकिस्तान पहुंचती थी। सीमा पर प्रतिबंधों के कारण इस आपूर्ति पर असर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि 17 अक्टूबर से LPG की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है।
12 किलो के सिलेंडर की कीमत में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पाकिस्तानी कारोबारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा बंद होने के कुछ ही दिनों में 12 किलो LPG सिलेंडर की कीमत करीब 56 प्रतिशत बढ़कर 7,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई। गैस की कीमतों में इतनी तेजी से बढ़ोतरी ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।
पहले से महंगाई का सामना कर रहे लोगों के लिए अब खाना पकाना भी महंगा हो गया है। जिन परिवारों की आमदनी सीमित है, उनके लिए सिलेंडर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। खासकर दिहाड़ी मजदूरों, छोटे कारोबारियों और रिक्शा चालकों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है।
रिक्शा चालकों की कमाई पर दोहरी मार, परिवारों ने घटाया खाना
लाहौर में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी का असर रिक्शा चालकों की जिंदगी पर भी दिखाई दे रहा है। मोटराइज्ड रिक्शा चलाने वाले राशिद अली ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उनका दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है और कई बार आधी रात तक काम करना पड़ता है।
उनके मुताबिक, पहले वह लंबे समय तक रिक्शा चलाकर रोजाना करीब 6.50 डॉलर यानी लगभग 1,800 पाकिस्तानी रुपये कमा लेते थे। यह रकम परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी। लेकिन LPG महंगी होने के बाद उनकी कमाई घटकर करीब 3 डॉलर प्रतिदिन रह गई है।
राशिद अली का कहना है कि गैस के बढ़ते खर्च के कारण अब परिवार को खाने-पीने में भी कटौती करनी पड़ रही है। उनके लिए मौजूदा हालात में घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
पाकिस्तान में महंगाई दर 9.6 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा
पाकिस्तान की आर्थिक परेशानी सिर्फ LPG संकट तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर महीने में देश की महंगाई दर बढ़कर 9.6 प्रतिशत तक पहुंच गई। ऊर्जा और गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
इसी बीच पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने भी ऊर्जा और गेहूं की कीमतों का हवाला देते हुए ब्याज दर बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी है। इससे कर्ज लेने वाले लोगों और कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने भी बढ़ाई परेशानी
पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवहन और रोजमर्रा के सामान की लागत पर भी असर डाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें पहले ही करीब 40 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं।
अब LPG की कीमतों में उछाल से घरेलू रसोई के साथ-साथ छोटे परिवहन कारोबार पर भी दबाव बढ़ गया है। रिक्शा चालकों के लिए गैस खरीदना महंगा हो गया है, जबकि आम परिवारों को खाना पकाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान में सीमा पर सप्लाई बाधित होने, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फिलहाल लोगों को राहत मिलने की उम्मीद गैस की आपूर्ति सामान्य होने और कीमतों पर नियंत्रण से जुड़ी है।












