Nandan Nilekani Biography: IIT से पद्म भूषण तक का सफर, जानिए कौन हैं नंदन नीलेकणि जिन्हें मिली परीक्षा सुधार की बड़ी जिम्मेदारी
NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इसकी कमान Infosys के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के सूत्रधार नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है।

नई दिल्ली। देश में NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी डिजिटल परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित आईटी उद्यमियों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में एक कोंकणी परिवार में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई बेंगलुरु और धारवाड़ में पूरी करने के बाद उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की।
Infosys की स्थापना में निभाई अहम भूमिका
साल 1981 में नंदन नीलेकणि ने एन.आर. नारायण मूर्ति और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की। कंपनी के शुरुआती दौर से जुड़े नीलेकणि 2002 से 2007 तक इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे। उनके कार्यकाल में Infosys ने वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई।
बाद में वे कंपनी से अलग हो गए, लेकिन 2017 में आंतरिक विवादों के बाद उन्हें गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) के रूप में फिर से जिम्मेदारी सौंपी गई।
आधार (UIDAI) परियोजना के मुख्य सूत्रधार
साल 2009 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने देश की महत्वाकांक्षी आधार (Aadhaar) परियोजना की रूपरेखा तैयार करने और उसे सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई।
आज आधार देश की डिजिटल पहचान व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
UPI और डिजिटल भुगतान को भी दी नई दिशा
नंदन नीलेकणि ने 2016 में केंद्र सरकार की उस उच्चस्तरीय समिति का भी नेतृत्व किया, जिसने देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने और UPI जैसे प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
राजनीति में भी आजमाई किस्मत
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नंदन नीलेकणि ने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली और इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।
पद्म भूषण से हो चुके हैं सम्मानित
आईटी, डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2006 में नंदन नीलेकणि को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया था।
अब परीक्षा सुधार की बड़ी जिम्मेदारी
अब केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली को डिजिटल, पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाने की जिम्मेदारी नंदन नीलेकणि को सौंपी है। माना जा रहा है कि उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और डिजिटल प्रशासन का अनुभव भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।









