रो पड़े रघुबर दास: राज्यपाल बनने पर समाजिक सम्मान समारोह में फफक पड़े, कहा… मोर मां-बाप मजदूरी करिस….काफी दूर….

रायपुर। राज्यपाल बनने के बाद छत्तीसगढ़ आये राज्यपाल रघुबर दास कार्यक्रम में रो पड़े। राज्यपाल बनने के बाद रघुवर दास का समाजिस कार्यक्रम में सम्मान समारोह आयोजित था। सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ से जुड़ी यादों को बयां करते हुए राज्यपाल फफक पड़े। ये जानना जरूरी है कि रघुवर दास मूल रूप से छत्तीसगढ़ के ही निवासी हैं, हालांकि उनके पिता नौकरी के सिलसिले में जमशेदपुर आये और वहीं फिर बस गये। रघुवर दास राज्यपाल बनने के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंचे थे।

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ओड़िशा का राज्यपाल बनाये जाने के बाद साहू समाज की तरफ से गुरुवार को सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक होटल में कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में गुजरे पलों को याद कर रघुबर दास फफक-फफककर रो पड़े। कार्यक्रम के दौरान रोते हुए रघुवर दास ने छत्तीसगढ़ी भाषा में कहा कि 1935 में मोर बाप मजदूरी करिस, जमशेदपुर गिस, काफी दूर चल के टाटा कंपनी में नौकरी करिस.. पढ़ाई कराइस, मोर माता-पिता ने मोला अच्छा इंसान बनाइस। आज जहां हम हे, उ सब हमर मां बाबूजी और सयान मन के आशीर्वाद से ही है।

अपने संबोधन में राज्यपाल रघुवर दास ने कहा…

राजनांदगांव में हमारी जमीन थी, जिसको 1979 में हमने बेच दिया. शुरू से पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ समाजिक काम में बढ़चढ़ कर भाग लेते थे। मैंने शुरुआती जीवन में गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए व्यवस्था की। मजदूरी करते हुए विधायक बना, सीएम और अब राज्यपाल भी बना।

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उन्होंने कहा कि उन्हें इस लायक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका मां की थी। मां बाप दोनों अनपढ़ थे, कॉलेज में जय प्रकाश आंदोलन चल रहा था। उस वक्त मेरी गिरफ्तारी हुई, जमशेदपुर जेल में जब भी पापा मिलने आते थे तो रोते थे, लेकिन मां नहीं रोती थी। मां कहती थी कोई चोरी करके जेल नहीं गए हो।

उन्होंने कहा कि हम कलयुग में जी रहे हैं. कलयुग में भी भगवान कृष्ण सदियों से ओडिशा के पवित्र धरती में जगन्नाथ भगवान के रूप में विराजमान है। मुझे जगन्नाथ भगवान ने गरीब पिछड़ों की सेवा के लिए बुलाया हैं। साहू समाज के अभिनंदन समारोह में आप सभी को जगन्नाथ भगवान के दर्शन के लिए आमंत्रित करता हूं।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ से जाने के बाद राज्यपाल रघुवर दास की जिंदगी गरीबी में गुजरी। उन्हें टाटा स्टील में मजूदरी तक करनी पड़ी, रघुवर दास श्रमिकों के नेता बन गए। उसी दौरान जेपी आंदोलन हुआ और वे राजनीति में आ गए।लेकिन बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और काफी कामयाब हुए।

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