‘गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं…’ से गूंजा रांची! रोजगार और अधिकारों की मांग पर छात्रों का हुंकार, ढोल-मांदर, नागपुरी गीत और पारंपरिक नारों के साथ सड़कों पर उतरे छात्र-युवा,आंदोलन हुआ और तेज

बोले- अधिकार मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष

रांची: झारखंड में रोजगार, शिक्षा और अपने अधिकारों की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को राजधानी रांची में आयोजित प्रदर्शन के दौरान हजारों छात्र-युवा, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर उतरे। ढोल-मांदर की थाप और नागपुरी गीतों के बीच “गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, माटी छोड़ब नहीं” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

‘यह सिर्फ नौकरी नहीं, झारखंड के भविष्य की लड़ाई’

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल रोजगार की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी, उसी तरह आज के युवाओं को भी अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना होगा।

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पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ियों पर उठाए सवाल

आंदोलन में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उनका कहना है कि शिक्षा का व्यापारीकरण हो रहा है और मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय नहीं मिल रहा।

अभिभावकों का दर्द भी आया सामने

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल अभिभावकों ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि वे मजदूरी और कर्ज लेकर अपने बच्चों की पढ़ाई कराते हैं, लेकिन नौकरी के समय योग्य युवाओं की अनदेखी की जाती है। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार के कारण मेहनती युवाओं को अवसर नहीं मिल रहे, जबकि झारखंड के संसाधनों का लाभ बाहरी लोग उठा रहे हैं।

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सांस्कृतिक रंग में दिखा आंदोलन

इस प्रदर्शन की सबसे खास बात इसका सांस्कृतिक स्वरूप रहा। ढोल-मांदर की थाप, नागपुरी गीतों और पारंपरिक नारों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। पूरे आंदोलन के दौरान झारखंडी संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी।

‘अधिकार मिलने तक नहीं हटेंगे पीछे’

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस दौरान “सरकार झुकती है, झुकाने वाला चाहिए” और “हम छात्र लड़ेंगे, हम जीतेंगे” जैसे नारों से रांची की सड़कें गूंजती रहीं। उन्होंने विश्वास जताया कि युवाओं की एकजुटता सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर करेगी।

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