रांची : “अब तो डायरेक्ट CM हेमंत सोरेन से ही बात होगी” लाठीचार्ज से बिफरे छात्र नेताओं ने दे दी चेतावनी, कहा, मुख्यमंत्री जी तानाशाह मत बनिये

Ranchi: "Now, we will speak directly to CM Hemant Soren." Angered by the lathi-charge, student leaders issued a warning, saying, "Chief Minister, do not act like a dictator."

रांची। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितता के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज हो गया है। लाठीचार्ज के बाद बिफरे छात्र नेताओं ने अब आर पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों का गुस्सा भड़क गया है। छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि अब सरकार के किसी मंत्री या प्रतिनिधिमंडल से बातचीत नहीं होगी, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से वार्ता की जाएगी। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि शुरुआत में आंदोलन एक दिवसीय कार्यक्रम के तौर पर तय था, लेकिन हजारों छात्रों के सड़कों पर उतरने के बाद यह आंदोलन अब व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।

‘अब किसी मंत्री से नहीं, सीधे मुख्यमंत्री से होगी बात’

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रविंद्र पासवान ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। ऐसे में अब सरकार के किसी प्रतिनिधि या मंत्री से बातचीत नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि छात्र अब सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपनी मांगों पर बातचीत करेंगे। छात्र नेता ने सरकारी प्रतिनिधिमंडल से आगे वार्ता करने से भी इनकार किया।उनका आरोप है कि सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। उलटे प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर से हटाने की कोशिश कर रहा है।

‘मुख्यमंत्री तानाशाह मत बनिए’

इधर, छात्र नेता ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों ने केवल अपनी मांगों को लेकर CBI जांच की मांग की है, लेकिन जवाब में पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया।

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उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र है और लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है।”

रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने अचानक कार्रवाई कर दी। उनका कहना है कि प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने पूरे दिन खाना तक नहीं खाया है और वे अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

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अभिभावकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील

छात्र नेता ने अभिभावकों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।उनके मुताबिक, युवाओं के भविष्य से जुड़े इस आंदोलन में अब अभिभावकों को भी आगे आना चाहिए और छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए।

17 दिन से सत्याग्रह, 9 दिन से भूख हड़ताल

आंदोलन में शामिल छात्र नेता देवेंद्र महतो ने बताया कि छात्र पिछले 17 दिनों से सत्याग्रह कर रहे हैं, जबकि 9 दिनों से भूख हड़ताल भी जारी है।उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें धक्का दिया और जबरन एंबुलेंस में बैठा दिया। देवेंद्र महतो का कहना है कि वह भूख हड़ताल पर हैं और इसके बावजूद पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उनके साथ बल प्रयोग किया।

महिला प्रदर्शनकारियों ने भी उठाए सवाल

प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी बल प्रयोग किया गया।छात्रा ने कहा कि सरकार एक तरफ महिला सम्मान और सुरक्षा की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ अपने अधिकारों की मांग कर रही महिलाओं के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की जा रही है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

पुलिस कार्रवाई के बाद छात्र नेताओं ने आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।अब छात्रों की नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संभावित वार्ता और सरकार की अगली कार्रवाई पर है। विधानसभा मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद JPSC-JSSC परीक्षा विवाद एक बार फिर राज्य की राजनीति और प्रशासन के केंद्र में आ गया है।

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