Health Tips : मां बनने का सपना तोड़ देती है ये बीमारी, दर्द ऐसा कि उठने भी न दे, जानें कौन सी है ये बीमारी, लक्षण, कारण और इलाज

This disease breaks the dream of becoming a mother, the pain is such that one does not even get up, know what is this disease of women, its symptoms, causes and treatment.

What disease is endometriosis?: आजकल कई महिलाओं को गर्भधारण में दिक्कत होती है। इसकी कई वजह हो सकती है, लेकिन एक बड़ी वजह एंडोमेट्रियोसिस भी है, जिसमें महिलाओं को ना सिर्फ असहनीय दर्द होता है, बल्कि ऐसी परेशानी होती है, जिससे वो उठ बैठ भी नहीं पाती। एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसा विकार है जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग बनाने वाले ऊतक से मिलता हुआ ऊतक गर्भाशय की गुहा के बाहर विकसित होने लगता है। गर्भाशय की लाइनिंग को एंडोमेट्रियम कहते हैं। जब ओवरी, बाउल और पेल्विस की लाइनिंग के ऊतकों पर एंडोमेट्रियल टिश्‍यू विकसित होने लगते हैं, तब एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या उत्‍पन्‍न होती है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लगभग 40 फीसदी महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस की वजह से गर्भधारण करने में दिक्‍कत आती है। ये एक ऐसी बीमारी, जो मां बनने का सपना चकनाचूर कर सकती है. दर्द भी ऐसा कि चलना-फिरना तो दूर उठना-बैठना तक मुहाल कर दे. लोग जानकारी के अभाव में इसे पीरियड्स पेन या गर्भाशय गांठ कह देते हैं। महिलाओं के गर्भाशय में एंडोमेट्रियम टिश्यू बनता है. या यूं कहें कि, जिससे गर्भाशय के अंदर परत बनती है और बढ़ने पर एंडोमेट्रियम परत गर्भाशय के बाहर की ओर फैलने लगती है।

एंडोमेट्रियम परत अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या अन्य प्रजनन अंगों तक फैलती है. इस परत के बढ़ने से वजाइना के मुख पर अतिरिक्‍त कोशिकाओं का विकास भी हो जाता है. यह परत फेलोपियन ट्यूब तक फैलने से अंडाशय की क्षमता पर असर पड़ता है, जो इंफर्टिलिटी का कारण बन सकता है. क्‍योंकि, स्‍पर्म फैलोपियन ट्यूब तक नहीं जा पाता. अब सवाल है कि, आखिर फेलोपियन ट्यूब क्या है? क्यों होता है एन्‍डोमेट्रिओसिस? क्या हैं लक्षण और उपचार?

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

एन्‍डोमेट्रिओसिस होने का कारण

एन्‍डोमेट्रिओसिस यह बाहरी संक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रणाली में कमी के चलते होती है. इस बीमारी के शिकंजे में आने वाली महिलाओं की दिनचर्या अनियमित हो जाती है, जिससे तनाव बढ़ता है. डॉक्टर बताती हैं कि, एन्‍डोमीट्रीओसिस की एक वजह खराब इम्‍युनिटी और किसी प्रकार के घाव या सर्जरी भी हो सकती है.

मां बनने से रोक सकता है

अगर आपकी कंसीव करने की कोशिश बार-बार नाकाम हो रही है तो इसकी वजह एंडोमेट्रियोसिस हो सकता है। इसमें महिलाओं की प्रजनन क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है। प्रेग्‍नेंसी के लिए महिलाओं की ओवरी में एक अंडा रिलीज होता है जो कि फैलोपियन ट्यूब के जरिए स्‍पर्म की कोशिका से फर्टिलाइज होता है और विकसित होने के लिए अपने आप ही यूट्राइन दीवार से जुड़ जाता है।
एंडोमेट्रियोसिस ट्यूब में रुकावट पैदा कर सकती है और अंडे एवं स्‍पर्म को एकसाथ जोड़कर रख सकती है। हल्‍के से सामान्‍य एंडोमेट्रियोसिस के मामलों में महिलाएं फिर भी गर्भधारण कर सकती हैं। एंडोमेट्रियोसिस से ग्रस्‍त महिलाओं को डॉक्‍टर सलाह देते हैं कि इन्‍हें जल्‍द से जल्‍द गर्भधारण कर लेना चाहिए क्‍योंकि समय के साथ इसकी स्थिति और खराब होती चली जाती है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण

हर महिला में एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अलग होते हैं। कुछ महिलाओं में हल्‍के तो कुछ में गंभीर लक्षण देखने को मिल सकते हैं। एंडोमेट्रियोसिस में पेल्विक हिस्‍से में दर्द होना सबसे सामान्‍य बात है। इसमें आपको निम्‍न लक्षण दिख सकते हैं :
मासिक धर्म के दौरान दर्द होना, मासिक धर्म से पहले और दौरान पेट के निचले हिस्‍से में दर्द होना, माहवारी के एक या दो हफ्ते के आसपास ऐंठन महसूस होना, माहवारी के बीच में ब्‍लीडिंग या पीरियड्स में ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना, इनफर्टिलिटी, सेक्‍स के दौरान दर्द होना, मल त्‍याग करने में असहज महसूस होना, मासिक धर्म के दौरान कभी भी कमर के निचले हिस्‍से में दर्द होना।

क्या होता है इसका इलाज

एन्‍डोमेट्रिओसिस की शिकार महिला के गर्भाशय की जांच की जाती है. यह जांच गर्भाशय में लैप्रोस्‍कोपी के जरिए होती है. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एंडोमेट्रियल टिशू को हटाने के लिए की जाती है. इस सर्जरी में गर्भाशय के अंदर की स्थिति का छोटे कैमरे से पता लगाते हैं, जिसमें पेल्विक के अंदर एन्‍डोमीट्रीओटिक हिस्सों को हटाते या लेजर की मदद से जलाते हैं. सर्जरी के बाद इसके फिर से उभरने की आशंका रहती है. और कई बार मल्टीपल सर्जरी भी करनी पड़ सकती हैं. इस बीमारी के इलाज के लिए कई बार हिस्टेरेक्टॉमी नाम की सर्जरी भी की जाती है. जिसमें गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को हटाने के साथ-साथ दोनों अंडाशय भी निकाले जाते हैं. इसलिए ऐसी किसी भी बीमारी को लापरबाही न बरतें. डॉक्टर की सलाह के नियमित दवाओं का सेवन करें.

Related Articles

close