TMC Rebel MP: ममता बनर्जी के 20 बागी सांसदों को मिली 15 दिन की मोहलत! 8 अक्टूबर तक देना होगा जवाब, अयोग्यता पर स्पीकर के सामने रखेंगे अपना पक्

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय ने चार हफ्ते की मांग ठुकराई; सांसदों ने 22 अक्टूबर तक समय मांगा था, लेकिन अब 8 अक्टूबर तक जवाब देना होगा

 

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की लोकसभा सदस्यता को लेकर चल रहा विवाद अब और अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय ने इन सांसदों को जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है। अब सभी 20 सांसदों को 8 अक्टूबर तक अपने खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जवाब देना होगा।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

बागी सांसदों ने पहले जवाब देने के लिए 22 अक्टूबर तक चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन उनकी मांग पूरी तरह स्वीकार नहीं की गई। अब उन्हें 8 अक्टूबर तक अपना पक्ष रखना होगा।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला टीएमसी के 20 सांसदों के पार्टी से अलग होने और Nationalist Citizens Party of India (NCPI) के साथ जुड़ने के दावे से संबंधित है। बागी सांसदों ने खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है और NCPI के साथ विलय का दावा किया है। दूसरी ओर, TMC का कहना है कि इन सांसदों ने पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी है और उन पर संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) लागू होती है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अभिषेक बनर्जी ने दाखिल की थीं 20 याचिकाएं

TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने जून में लोकसभा स्पीकर के सामने 20 अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। उन्होंने मांग की थी कि पार्टी के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित होकर बाद में अलग राजनीतिक समूह से जुड़ने वाले सांसदों की सदस्यता पर दल-बदल कानून के तहत फैसला किया जाए।

बनर्जी का तर्क है कि दसवीं अनुसूची के तहत यदि कोई सांसद स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ता है तो अयोग्यता का प्रावधान लागू हो सकता है। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से NCPI के साथ विलय को लेकर अलग कानूनी स्थिति का दावा किया गया है। अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत होना है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है मामला

इस विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। 25 अगस्त को शीर्ष अदालत ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया था। याचिका में स्पीकर के सामने लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला कराने की मांग की गई थी।

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में जल्द निर्णय की अपेक्षा जताई है, हालांकि उसने स्पीकर के लिए कोई निश्चित अंतिम समयसीमा तय नहीं की। इसके बाद अब बागी सांसदों के जवाब की नई समयसीमा 8 अक्टूबर तय की गई है।

अब आगे क्या होगा?

अब 20 बागी सांसदों को 8 अक्टूबर तक अपनी-अपनी दलील और दस्तावेज लोकसभा सचिवालय के सामने रखने होंगे। इसके बाद स्पीकर के स्तर पर अयोग्यता याचिकाओं पर आगे की प्रक्रिया होगी।

फिलहाल सांसदों की सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मामला दसवीं अनुसूची, कथित पार्टी बदलाव/विलय और संबंधित कानूनी दावों के आधार पर आगे बढ़ रहा है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

close