बिहार में शिक्षक भर्ती पर मचा बवाल, डोमेसाइल नियम पर 72 घंटे का अभ्यर्थियों ने दिया अल्टीमेटम, कहा, फैसला वापस लें, नहीं तो…

पटना। बिहार में जब से शिक्षक भर्ती शुरू हुई, तब से विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब तक अभ्यर्थी को नियमावली की कुछ शर्तों पर ही ऐतराज था, लेकिन कैबिनेट के कल के फैसले के बाद अब पूरी शिक्षक भर्ती नियमावली ही आलोचनाओं के घेरे में आ गयी है। बिहार में नई शिक्षा नियमावली में डोमिसाइल पॉलिसी को खत्म किए जाने पर शिक्षक अभ्यर्थियों में काफी आक्रोश है। शिक्षक अभ्यर्थियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि नई शिक्षा नियमावली में डोमिसाइल नीति लागू की जाए नहीं तो 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी सड़क पर उतरेंगे। सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। इसके लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है।

आपको बता दें कि बिहार में शिक्षक नियुक्ति नियमावली में नीतीश सरकार ने बदलाव किया गया है। भर्ती में बिहार का स्थायी निवास की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब शिक्षक नियुक्ति में बिहार के बाहर के भी अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। सरकार के इस फैसले से बिहार के शिक्षक और कैंडिडेट्स नाराज हैं। इसका जमकर विरोध हो रहा है। भाजपा ने भी नीतीश सरकार को निशाने पर लिया है। दरअसल, शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने मंगलवार को कहा था कि बिहार के युवा इंग्लिश, मैथ्स और साइंस के लिए योग्य नहीं है। इसी वजह से पूरे देश से आवेदन मांगा गया है। शिक्षा मंत्री के इसी बयान पर शिक्षक अभ्यर्थियों ने नाराजगी जताई है।

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अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री बिहार के युवाओं को अयोग्य बता रहे हैं। अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री को ही अयोग्य करार दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार चाणक्य, आर्यभट्ट, वशिष्ठ नारायण सिंह, आनंद कुमार, के. सी. सिन्हा जैसे शिक्षाविदों की धरती रही है। दिल्ली के मुखर्जी नगर और कोटा में 90% शिक्षक बिहारी होते हैं। यह शिक्षा मंत्री को पता होना चाहिए।

बिहार में कोई उद्योग धंधा नहीं है और यहां पब्लिक सेक्टर में ही रोजगार का एकमात्र ऑप्शन बचता है, वह भी छीनने की कोशिश की जा रही है। शिक्षक बहाली में डोमिसाइल पॉलिसी खत्म किए जाने के फैसले का सभी शिक्षक अभ्यर्थी कड़ा विरोध करते हैं।

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शिक्षा मंत्री बिहार के अभ्यर्थियों को अयोग्य कहते हैं। जबकि बिहार के युवा पूरे देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा का डंका बजाते हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्री बिहारी युवाओं को अयोग्य घोषित कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का काम कर रहे हैं।इसके लिए शिक्षा मंत्री को माफी मांगना होगा।

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