Vivah Muhurat July 2026: जुलाई में सिर्फ 5 दिन बजेंगी शहनाइयां, फिर 4 महीने तक बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य, बस 13 दिन का है वक्त

जुलाई 2026 में विवाह के लिए केवल 5 शुभ मुहूर्त हैं। जानिए 1, 6, 7 और 11 जुलाई के शुभ विवाह मुहूर्त, गुरु तारा अस्त और देवशयनी एकादशी के बाद क्यों बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य। Tags

जुलाई 2026 में विवाह की योजना बना रहे लोगों के लिए यह महीना बेहद खास होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस महीने विवाह के लिए केवल पांच शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसके बाद गुरु तारा अस्त होने और देवशयनी एकादशी शुरू होने के कारण करीब चार महीने तक विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ऐसे में जिन परिवारों में शादी की तैयारियां चल रही हैं, उन्हें समय रहते शुभ मुहूर्त का चयन कर लेना चाहिए।

धर्म डेस्क। Marriage Muhurat, Hindu Marriage Date 2026। हिंदू धर्म में विवाह को 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की अनुकूल स्थिति में संपन्न विवाह दांपत्य जीवन को सुख, समृद्धि और स्थिरता प्रदान करता है। यही कारण है कि विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए शादी को लेकर मुहूर्त तलाशने में विशेष सतर्कता बरती जाती है।

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पंचांग के अनुसार जुलाई 2026 में विवाह के लिए केवल 5 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसके बाद गुरु तारा अस्त होने और देवशयनी एकादशी शुरू होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। चतुर्मास की वजह से चार महीने तक कोई भी शुभ कार्य नहीं होगा। इसलिए शुभ कार्य को लेकर इस वक्त काफी व्यस्तता दिख रही है।

जानिये कब हैं जुलाई 2026 के विवाह मुहूर्त

1 जुलाई 2026 (बुधवार)
• शुभ मुहूर्त: सुबह 6:51 बजे से शाम 4:04 बजे तक
• तिथि: द्वितीया
• नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
महीने का पहला विवाह मुहूर्त उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में बन रहा है। यह नक्षत्र स्थायी और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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6 जुलाई 2026 (सोमवार)
• शुभ मुहूर्त: रात 1:41 बजे से 7 जुलाई सुबह 5:29 बजे तक
• तिथि: सप्तमी
• नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में विवाह करना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस दिन विवाह के लिए विशेष शुभ योग बन रहा है।

7 जुलाई 2026 (मंगलवार)
• शुभ मुहूर्त: सुबह 5:29 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक
• तिथि: सप्तमी-अष्टमी
• नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद
लगातार दूसरे दिन भी विवाह का शुभ संयोग रहेगा। जिन लोगों का विवाह 6 जुलाई को संभव नहीं हो पाएगा, उनके लिए यह दिन भी उत्तम रहेगा।

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11 जुलाई 2026 (शनिवार)

• शुभ मुहूर्त: रात 12:05 बजे से 12 जुलाई सुबह 5:32 बजे तक
• तिथि: द्वादशी-त्रयोदशी
• नक्षत्र: रोहिणी
रोहिणी नक्षत्र को विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के लिए सबसे श्रेष्ठ नक्षत्रों में गिना जाता है।

12 जुलाई के बाद क्यों नहीं होंगे विवाह?

पंचांग के अनुसार 12 जुलाई से 14 जुलाई तक गुरु के वृद्धत्व (वृद्ध अवस्था) के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाएंगे। इसके बाद 15 जुलाई से 31 जुलाई तक गुरु तारा अस्त रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को विवाह, संतान और पारिवारिक सुख का कारक माना गया है। गुरु अस्त होने की अवधि में विवाह करना शुभ नहीं माना जाता।

25 जुलाई से चार महीने तक बंद हो जाएंगे शुभ कार्य

25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है।चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। अब अगले शुभ विवाह मुहूर्त देवउठनी एकादशी के बाद ही शुरू होंगे।

विवाह में शुभ मुहूर्त का क्या है महत्व?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह के समय ग्रहों, तिथि, वार, योग और नक्षत्र की अनुकूल स्थिति दांपत्य जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। शुभ मुहूर्त में विवाह होने से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, सुख-समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य बढ़ने की मान्यता है।हालांकि विवाह की अंतिम तिथि तय करने से पहले कुंडली मिलान और किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना भी आवश्यक माना जाता है।

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