Health News: 9 घंटे से ज्यादा सोना मौत की बन सकती है वजह, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा, इन बीमारियों का बढ़ा देता है 60 फीसदी ज्यादा रिस्क
Health News: क्या आप 7 घंटे से कम या 9 घंटे से ज्यादा सोते हैं? जानिए कैसे कम या अधिक नींद स्ट्रोक, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और समय से पहले मौत का खतरा बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों की सलाह भी पढ़ें।

Health News। नींद को लेकर एक बेहद चौकाने वाला रिसर्च सामने आया है। नींद का सीधा रिश्ता आपकी सेहत से है। रिसर्च के मुताबिक अगर आप रोजाना 7 घंटे से कम सोते हैं या फिर 9 घंटे से ज्यादा बिस्तर पर बिताते हैं, तो यह आदत आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। हाल के वर्षों में हुई कई मेडिकल रिसर्च में सामने आया है कि कम या अधिक नींद दोनों ही स्ट्रोक, हार्ट डिजीज, डायबिटीज और समय से पहले मौत के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
जानिये कितना सोना चाहिये
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी सेहत के लिए संतुलित और नियमित नींद उतनी ही जरूरी है, जितना संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम।विश्व स्तर पर हर साल करीब 1.5 करोड़ लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं। इनमें लगभग 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जबकि 50 लाख लोग स्थायी विकलांगता के साथ जीवन बिताने को मजबूर हो जाते हैं। अमेरिका में भी हर साल करीब 7.95 लाख लोगों को स्ट्रोक आता है।
कम नींद वाले भी रहें सावधान
विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और खराब जीवनशैली के साथ-साथ अनियमित नींद भी स्ट्रोक का बड़ा कारण बन रही है।हाल ही में न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह सामने आया कि नियमित रूप से कम नींद लेने या जरूरत से ज्यादा सोने वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। शोध में यह भी पाया गया कि दिन में लंबे समय तक झपकी लेना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
वहीं, यूके बायोबैंक के 88 हजार से अधिक वयस्कों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि 170 से ज्यादा बीमारियों का सीधा संबंध खराब नींद से है। इनमें पार्किंसंस रोग, टाइप-2 डायबिटीज, एक्यूट किडनी फेलियर और कई गंभीर हृदय रोग शामिल हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जरूरत से ज्यादा सोने वाले लोगों में समय से पहले मृत्यु का खतरा कम सोने वालों की तुलना में अधिक पाया गया।
झपकी लेना सेहत के लिए अच्छा
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ रात की नींद ही नहीं, बल्कि दिन में ली जाने वाली लंबी झपकी भी नुकसान पहुंचा सकती है। रिसर्च के अनुसार 30 मिनट से ज्यादा की नैप लेने से भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकता है। स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक दिन में 20 से 30 मिनट की झपकी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इससे शरीर तरोताजा रहता है और गहरी नींद की स्थिति भी नहीं बनती।
7 से 9 घंटे की नींद काफी अच्छी
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग (NIA) और अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (AASM) के अनुसार वयस्कों के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद सबसे बेहतर मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को दिनभर अत्यधिक नींद आती है, चिड़चिड़ापन रहता है, याददाश्त कमजोर हो रही है या लगातार थकान महसूस होती है, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
अनिंद्रा की चपेट में भारतीय
भारत में भी नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार करीब 58 प्रतिशत लोग रात 11 बजे के बाद सोते हैं, जबकि 88 प्रतिशत लोगों की नींद रात में कई बार टूटती है। देश में हर चार में से एक व्यक्ति अनिद्रा की समस्या से जूझ रहा है और केवल 35 प्रतिशत लोग ही प्रतिदिन आठ घंटे की पूरी नींद ले पाते हैं।
नींद का कई बीमारी से सीधा संबंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 7 घंटे से कम नींद लेने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायराइड, कोलेस्ट्रॉल और हार्मोनल असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम लगभग 14 प्रतिशत अधिक पाया गया है। वहीं 9 घंटे से ज्यादा सोने वालों में यह खतरा करीब 34 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं, जिससे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने, स्ट्रेस हार्मोन के असंतुलित होने और शरीर में सूजन बढ़ने से डायबिटीज का खतरा भी कई गुना बढ़ सकता है।








