सेहत की बात: गले में खराश, निगलने में दिक्कत को न करें नजरअंदाज, टॉन्सिल नहीं कैंसर के भी हो सकते हैं संकेत

HPV Throat Cancer Symptoms। गले में लगातार खराश, निगलने में परेशानी या गर्दन में गांठ जैसी समस्याओं को अक्सर लोग सामान्य संक्रमण, टॉन्सिल या मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण कुछ मामलों में गंभीर बीमारी, यहां तक कि कैंसर का संकेत भी हो सकते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) केवल सर्वाइकल कैंसर का ही नहीं, बल्कि गले के एक खतरनाक कैंसर ओरोफैरिंजियल कैंसर का भी प्रमुख कारण बनता जा रहा है। यह कैंसर मुख्य रूप से टॉन्सिल और जीभ के पिछले हिस्से को प्रभावित करता है।

युवाओं में भी बढ़ रहे हैं मामले

विशेषज्ञ बताते हैं कि एचपीवी दुनिया के सबसे आम वायरल संक्रमणों में से एक है। अधिकांश लोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इस वायरस को खत्म कर देती है, लेकिन कुछ मामलों में यह वायरस वर्षों तक शरीर में बना रहता है और बाद में कैंसर का कारण बन सकता है।चिंता की बात यह है कि अब ऐसे युवाओं में भी ओरोफैरिंजियल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जो न तो तंबाकू का सेवन करते हैं और न ही शराब पीते हैं। भारत में भी एचपीवी से जुड़े गले के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।

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ये लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच

हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती दौर में इस कैंसर के लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं। इसलिए लोग समय पर जांच नहीं कराते।इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—

  • गले में लगातार खराश रहना
  • निगलने में कठिनाई होना
  • गर्दन में गांठ महसूस होना
  • आवाज में बदलाव आना
  • गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना
  • लंबे समय तक गले में दर्द बने रहना

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

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समय पर पहचान से बढ़ती है इलाज की सफलता

डॉक्टरों के अनुसार एचपीवी-पॉजिटिव ओरोफैरिंजियल कैंसर के मरीज उपचार के प्रति अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिक्रिया देते हैं। इसलिए समय पर जांच और निदान बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

एचपीवी वैक्सीन से हो सकता है बचाव

विशेषज्ञ एचपीवी वैक्सीन को इस संक्रमण से बचाव का प्रभावी उपाय मानते हैं। यह वैक्सीन उन उच्च जोखिम वाले एचपीवी प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करती है जो कैंसर के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार—

  • 9 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को 2 डोज दी जाती हैं।
  • दोनों डोज के बीच 6 से 12 महीने का अंतर रखा जाता है।
  • 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र में 3 डोज की आवश्यकता होती है।
  • यह वैक्सीन लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए लाभकारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एचपीवी वैक्सीन केवल सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि कई अन्य एचपीवी से जुड़े कैंसरों के खतरे को भी कम करने में मदद करती है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

डॉक्टरों का मानना है कि गले की लगातार समस्याओं को सामान्य संक्रमण समझकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है। समय पर जांच, सही उपचार और एचपीवी वैक्सीनेशन के जरिए इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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