एक गलत सर्जरी ने बदल दी जिंदगी, आंखों से लगातार बहते आंसू और कभी न बंद होने वाली पलकों का दर्द बना रोज की सजा

6 साल पहले करवाया था ब्यूटी ट्रीटमेंट, अब हर रात खुली आंखों से सोने को मजबूर महिला, डॉक्टरों ने बताई चौंकाने वाली वजह

पूर्वी चीन की एक महिला के लिए खूबसूरती बढ़ाने का सपना आज जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन चुका है। छह साल पहले करवाया गया एक कॉस्मेटिक ऑपरेशन अब उसके लिए ऐसा दर्द बन गया है, जिससे वह हर दिन और हर रात जूझने को मजबूर है। हालत यह है कि महिला अब आंखें पूरी तरह बंद करके सो भी नहीं पाती और उसकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहते हैं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वांग सरनेम वाली महिला ने हाल ही में मीडिया के सामने अपनी आपबीती साझा की। उसने बताया कि वर्ष 2020 में वह डबल आईलिड सर्जरी कराने के लिए जियांग्सू प्रांत के सूजो स्थित एक कॉस्मेटिक क्लिनिक पहुंची थी। इस प्रक्रिया पर उसने करीब 12 हजार युआन यानी लगभग पौने दो लाख रुपये खर्च किए थे।

लेकिन सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद उसकी जिंदगी में दर्दनाक मोड़ आ गया। महिला को आंखों में असहनीय दर्द होने लगा, पलकों का आकार बिगड़ गया और आंखों के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगा। हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल बड़े अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

पीड़िता का आरोप है कि सर्जरी करने वाली मेंग नामक महिला ने खुद को क्लिनिक का मार्केटिंग डायरेक्टर बताया था। जब ऑपरेशन के बाद दिक्कतें बढ़ीं तो उसने फोन पर आश्वासन दिया कि कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा, लेकिन बाद में उसने फोन उठाना ही बंद कर दिया।

अस्पताल में जांच के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। डॉक्टरों ने पाया कि महिला की लैक्रिमल ग्लैंड यानी आंसू बनाने वाली ग्रंथि को नुकसान पहुंचा दिया गया था। इसके अलावा पलकों की सर्जरी भी गलत तरीके से की गई थी। डॉक्टरों ने सुधारात्मक सर्जरी की सलाह दी, लेकिन दूसरी सर्जरी के बाद भी उसकी पलकें पूरी तरह बंद नहीं हो सकीं।

आज स्थिति यह है कि महिला को खुली आंखों के साथ सोना पड़ता है और उसकी आंखों से लगातार आंसू निकलते रहते हैं। चिकित्सकीय मूल्यांकन में उसकी स्थिति को ‘ग्रेड-9 विकलांगता’ की श्रेणी में रखा गया है, जबकि चीन में ग्रेड-10 को सबसे गंभीर विकलांगता माना जाता है।

जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ। नगर निगम के स्वास्थ्य प्राधिकरण ने पाया कि सर्जरी करने वाली महिला के पास डॉक्टर होने का कोई वैध प्रमाणपत्र नहीं था। इतना ही नहीं, जिस मेइक्सी कॉस्मेटिक क्लिनिक में ऑपरेशन किया गया था, उसके पास भी आवश्यक व्यावसायिक लाइसेंस मौजूद नहीं था। मामले के सामने आने के कुछ महीनों बाद क्लिनिक को बंद कर दिया गया।

न्याय की लड़ाई लड़ते हुए वांग ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कानूनी कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत पीड़िता को करीब सवा करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमति बनी।

यह मामला एक बार फिर कॉस्मेटिक सर्जरी के नाम पर चल रहे अवैध और गैर-प्रशिक्षित क्लीनिकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह की सर्जरी कराने से पहले डॉक्टर की योग्यता और क्लिनिक की वैधता की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही जिंदगीभर का दर्द बन सकती है।

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