झारखंड में 2000 से अधिक व्यावसायिक प्रशिक्षकों का वेतन संकट, 14 माह से भुगतान नहीं; आंदोलन तेज

Salary crisis for over 2,000 vocational trainers in Jharkhand; unpaid for 14 months; agitation intensifies.

रांची। झारखंड के विभिन्न प्लस टू विद्यालयों में कार्यरत 2000 से अधिक व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान को लेकर सरकार और विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रशिक्षकों का आरोप है कि उन्हें पिछले 14 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जबकि वे सरकारी शिक्षकों के बराबर कार्य कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, इन सभी प्रशिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2014 से आउटसोर्सिंग के माध्यम से निजी कंपनियों के जरिए की गई थी। वर्तमान में उन्हें लगभग 20,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जिसमें से 3 से 4 हजार रुपये तक की कटौती कंपनियों द्वारा कर ली जाती है। प्रशिक्षकों का कहना है कि अन्य राज्यों में इसी पद पर कार्यरत कर्मियों को 35,000 से 38,000 रुपये तक वेतन मिल रहा है, लेकिन झारखंड में पिछले 8 वर्षों से न तो वेतन वृद्धि हुई है और न ही नियमित भुगतान की व्यवस्था सुधरी है।

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प्रशिक्षकों ने लगाया गंभीर आरोप

प्रशिक्षकों ने आरोप लगाया कि वेतन संबंधी शिकायतों पर कंपनी विभाग की ओर और विभाग कंपनी की ओर मामला टाल देता है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। लगातार अनदेखी से परेशान होकर व्यावसायिक प्रशिक्षक 8 जून से धरना पर बैठे हुए हैं।

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आंदोलनरत प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे 13 जून को मुख्यमंत्री आवास के समक्ष बड़ा प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले भी कई बार धरना, ज्ञापन और पत्राचार के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार और प्रशासन तक पहुंचाई गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
प्रशिक्षकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया वेतन भुगतान, नियमित वेतन वृद्धि और पारदर्शी भुगतान प्रणाली लागू करने की मांग की है।

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