मंत्री आलमगीर देंगे इस्तीफा या फिर होगी बर्खास्तगी ? जानिये क्या है मंत्री को हटाने के नियम, CM के पास क्या हैं अधिकार

रांची। मंत्री आलमगीर आलम का अब क्या होगा ? मंत्री पद से खुद इस्तीफा देंगे या फिर मुख्यमंत्री उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त करेंगे। आलमगीर आलम की गिरफ्तारी जब से हुई है, तभी से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर झारखंड की सियासी गलियारों में खूब अटकलें लग रही है। मनी लांड्रिंग के जिस मामले में आलमगीर आलम की गिरफ्तारी हुई है, उससे एक बात तो साफ है कि हाल-फिलहाल में उन्हें ED के शिकंजे से राहत मिलनी नहीं है। ऐसे में आचार संहिता तक अगर आलमगीर आलम को नहीं भी हटाया गया, तो आचार संहिता के बाद उनके विभाग का प्रभार या तो किसी अन्य मंत्री को देना होगा या फिर आलमगीर आलम को कैबिनेट से बर्खास्त कर कांग्रेस के किसी अन्य विधायक को मंत्री पद की शपथ दिलायी जायेगी।

वैसे देखा जाये तो जिस वक्त में आलमगीर आलम की गिरफ्तारी हुई है, वो कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत है। मौजूदा वक्त में आलमगीर आलम की पार्टी में हैसियत अगर नंबर-1 की है, तो सरकार में उनकी पोजिशन नंबर-2 की है। जाहिर है भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आलमगीर की गिरफ्तारी सिर्फ कांग्रेस की किरकिरी नहीं है, बल्कि सरकार के लिए भी सरदर्द है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मंत्री पद से इस्तीफा या फिर बर्खास्तगी

वैसे राजनीति में नैतिकता तो यही कहती है कि गिरफ्तारी के पहले ही मंत्री आलमगीर आलम को इस्तीफा दे देना चाहिये था। जैसा की हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी के पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन अरविंद केजरीवाल ने सियासी नैतिकता को ही ठेंगा दिखा दिया। वो जेल में रहते हुए भी मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। यही स्थिति उनके मंत्री सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया की भी थी, जो गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद होने पर भी मंत्री पद पर बने रहे। हालांकि काफी दिनों के बाद दोनों ने इस्तीफा दिया। ईडी ने ही नौकरी घोटाले में जब तमिलनाडू के मंत्री बालाजी सेंथिल को गिरफ्तार किया था, तो उन्होंने भी करीब 1 महीने तक इस्तीफा नहीं दिया। वो जेल में बंद होकर भी सरकार में मंत्री बने रहे। वैसे जानकार बताते हें कि मंत्री को पद पर बनाये रखने और बरखास्त करने का पूरा अधिकार मुख्यमंत्री के पास है। अगर वो चाहें तो मंत्री का इस्तीफा ले भी सकते है या फिर उन्हें कैबिनेट में बनाये रख भी सकते हैं। इस अवधि में गिरफ्तार मंत्री के विभाग का बंटवारा किसी अन्य मंत्री में किया जा सकता है या फिर मुख्यमंत्री खुद ही संबंधित मंत्री का सारा विभाग अपने देख सकते हैं।

मंत्री पद पर रहते हुए गिरफ्तार (Minister Arrest Procedure) होने के बाद लोगों के मन में सवाल है कि क्या किसी भी मंत्री को पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है या फिर मंत्री को गिरफ्तार करने से पहले कुछ नियमों का पालन किया जाता है. ऐसे में हम आपको बताते हैं कि किसी भी राज्य के मंत्री या केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार करने की क्या प्रक्रिया है और क्या किसी मंत्री को सीधे गिरफ्तार किया जा सकता है. तो जानते हैं देश के मंत्रियों को गिरफ्तार करने के लिए किस प्रोसेस को पूरा करना होता है…

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

केंद्रीय मंत्री को कैसे गिरफ्तार किया जाता है?

अगर केंद्रीय मंत्रियों की बात करें तो उन्हें संसद सत्र के दौरान थोड़ी रियायत मिलती है. यानी संसद सत्र के दौरान किसी मंत्री को गिरफ्तार करने के लिए वारंट किया जाता है तो उन्हें कुछ सुविधाएं मिलती हैं और उन्हें सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. लेकिन, अगर संसद सत्र नहीं चल रहा है तो कानून लागू करने वाली संस्थाएं एक केंद्रीय मंत्री को आपराधिक मामलों में गिरफ्तार कर सकती हैं. इसके साथ ही दीवानी मामलों के लिए अलग नियम है.

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

राज्यसभा के रूल्स ऑफ प्रोसीजर और कॉन्डक्ट ऑफ बिज़नेस के धारा 22 A के तहत, किसी भी मंत्री को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस, जज और मजिस्ट्रेट को राज्यसभा के सभापति को एक निर्धारित फॉर्मेट में जानकारी देनी होती है. इसमें गिरफ्तारी का कारण और हिरासत/कैद की जगह बतानी होती है. इसके बाद अगर राज्यसभा की कार्यवाही चल रही हो तो सभापति गिरफ्तारी की जानकारी सदन के साथ बांटते हैं. अगर सदन न चल रहा हो तो ये जानकारी राज्यसभा के बुलेटिन में प्रकाशित की जाती है.

सासंदों को कितनी छूट मिलती है?

आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री को विशेषाधिकार होते हैं और उन्हें गिरफ्तारी से छूट मिलती है. माना जाता है कि कोई भी संसद सत्र शुरू होने से 40 दिन पहले और 40 दिन बाद तक उन्हें विशेष अधिकार मिलते हैं और ये छूट सिर्फ दीवानी मामलों में होती है. दूसरे मामलों में एहतियातन नज़रबंदी या प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधान लागू होते हैं और तब भी सांसद गिरफ्तारी से छूट का दावा नहीं कर सकते.

राज्य मंत्रियों के लिए क्या है नियम?

राज्य मंत्रियों की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एडवोकेट प्रेम जोशी कहते हैं, केंद्रीय मंत्रियों की तरह राज्य के मंत्रियों के लिए गिरफ्तारी में खास व्यवस्था नहीं है. सीआरपीसी की धारा 41 से 60 पुलिस को गिरफ्तारी का विशेषाधिकार देती है. सीआरपीसी की धारा 78 से 81 किसी विशेष स्थान के अधिकार क्षेत्र से बाहर गिरफ्तारी प्रक्रिया का प्रावधान करती है. पुलिस अधिकारी द्वारा जांच करने के लिए पहले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से बाहर जाने के लिए लिखित रूप में या फोन पर वरिष्ठ अधिकारियों की पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होती है.

Related Articles

close