नेपाल त्रासदी में मौतों का आंकड़ा 600 के करीब! 2,500 लोग लापता, सैकड़ों भारतीयों से संपर्क टूटा; पहाड़ों में अब भी मंडरा रहा बड़ा खतरा

Nepal Flood Tragedy: नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। तबाही के बाद अब जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। इस आपदा में करीब 600 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

सबसे चिंता की बात यह है कि लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कई परिवारों का अपने करीबियों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाके, टूटे पुल और सड़कें अभियान की राह में बड़ी बाधा बन रही हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

नेपाल त्रासदी में मौतों का आंकड़ा 600 के करीब

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने के बाद अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का तेज बहाव रास्ते में आने वाली बस्तियों और ढांचों को तबाह करता चला गया।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और तिब्बत में मिलाकर मृतकों की संख्या करीब 600 तक पहुंच चुकी है। वहीं, हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

करीब 2,500 लोग अब भी लापता

तबाही के बाद सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 2,500 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

कई प्रभावित इलाकों में सड़कें और पुल बह जाने के कारण बचाव दलों के लिए पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कुछ स्थानों पर हाइड्रोपावर परियोजनाओं के सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका भी जताई गई है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

भारतीय नागरिकों को लेकर भी बढ़ी चिंता

इस त्रासदी के बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, 320 भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के करीब 100 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है।

हालांकि, भारतीय नागरिकों के लापता होने के आंकड़े अलग-अलग समय पर बदलते रहे हैं और आधिकारिक सूची में लगातार अपडेट हो रही है। इसलिए अंतिम संख्या की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की ताजा जानकारी से ही की जानी चाहिए।

वहीं तिब्बत में मौजूद भारतीय नागरिकों के सुरक्षित होने की जानकारी भी सामने आई है।

90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

बाढ़ की चपेट में आने से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और बिजली से जुड़े ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी इस आपदा का गंभीर असर पड़ा है। रिपोर्टों में सैकड़ों परियोजना कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत दल सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

फिर आ सकती है बड़ी बाढ़? नदी के बढ़ते पानी ने बढ़ाई चिंता

सबसे बड़ा खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। बाढ़ के बाद पहाड़ी इलाकों में मलबे के कारण पानी जमा होने से नई झीलें बनने और उनके ओवरफ्लो होने का खतरा पैदा हुआ है। इससे दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है।

भोटेकोशी नदी के बढ़ते पानी को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि, शनिवार सुबह तक भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के बहाव को सामान्य बताया गया था।

राहत-बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती

नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए हजारों सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। लेकिन पहाड़ी इलाकों में भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें, टूटे पुल और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से अभियान बेहद मुश्किल हो गया है।

नेपाल ने अब सामान्य सर्च एंड रेस्क्यू के बजाय कुछ विशेष तकनीकी मदद की जरूरत बताई है। सरकार ने सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, परिवहन और संचार व्यवस्था बहाल करने, शवों की पहचान और DNA जांच जैसी तकनीकी सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

तबाही के बाद भी खतरा खत्म नहीं

नेपाल-तिब्बत सीमा पर हुई यह त्रासदी सिर्फ एक बाढ़ की घटना नहीं रही। ग्लेशियर, चट्टानों, मलबे और पानी के इस विनाशकारी मिश्रण ने पूरे इलाके के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

अब राहत टीमों के सामने एक तरफ हजारों लापता लोगों को तलाशने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पहाड़ों में बन रही नई झीलों और संभावित बाढ़ के खतरे पर नजर रखना भी जरूरी है। आने वाले कुछ दिन राहत और बचाव अभियान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

close