Nepal Flash Flood: मलबा उगल रही नदियां, एक-एक कर निकल रहे शव… 475 मौतों के बाद भी नहीं थमी तलाश, 290 भारतीय समेत 1600 लापता

काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त की सुबह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड को 72 घंटे यानी तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का मंजर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। पानी का उफान भले शांत पड़ गया हो, लेकिन अब नदियों और मलबे से लाशें निकलने का सिलसिला जारी है। रसुवा समेत कई इलाकों में जहां कभी घर, सड़कें और पुल थे, वहां अब सिर्फ मलबे का ढेर नजर आ रहा है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में अब तक 475 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1600 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें करीब 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों के प्रभावित या लापता होने की जानकारी सामने आई है।
तीन दिन बाद नदी शांत, लेकिन मलबे में जिंदगी की तलाश
ग्लेशियर के टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक आए पानी और भारी मलबे ने रसुवा समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। फ्लैश फ्लड इतनी तेज थी कि रास्ते में आने वाले घर, वाहन, सड़कें और पुल तक बह गए।
अब नदी का बहाव कुछ शांत हुआ है, लेकिन राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे दबे लोगों और शवों को तलाशना है। तीन दिन बाद भी अलग-अलग इलाकों से शव मिलने का सिलसिला जारी है।
चितवन में मिले सबसे ज्यादा शव
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चितवन जिले से अब तक 137 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों से भी शव मिले हैं।
बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि नेपाल के बड़े हिस्से के बुनियादी ढांचे को भी तबाह कर दिया है।
35 पुल और 45 झूला पुल बह गए
विनाशकारी बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन यानी झूला पुल बह गए हैं। करीब 40 किलोमीटर सड़कें भी क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। इससे कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है।
इसके अलावा करीब 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। त्रिशूली और देवीघाट जैसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।
जिस त्रिशूली नदी को अपने तेज बहाव और व्हाइट वाटर राफ्टिंग के लिए जाना जाता है, उसी में आई बाढ़ ने इस बार तबाही का ऐसा रूप दिखाया कि नदी किनारे बसे इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।
350 मजदूरों की टनल से हुई सुरक्षित वापसी
इस भीषण आपदा के बीच राहत की एक बड़ी खबर भी सामने आई है। त्रिशूली हाइड्रोपावर की टनल में फंसे करीब 350 मजदूरों और कर्मचारियों को नेपाली सेना ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
बताया जा रहा है कि इस हाइड्रोपावर परियोजना में कई भारतीय मजदूर भी काम कर रहे थे। सेना की टीम ने टनल के अंदर फंसे सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
करीब 1600 लोगों को बचाया गया
नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक करीब 1600 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें लगभग 796 लोगों को हेलीकॉप्टर और करीब 796 लोगों को जमीनी रास्ते से बाहर निकाला गया है।
हालांकि, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। राहत टीमों का फोकस अब उन इलाकों पर है जहां बाढ़ और मलबे के कारण लोगों के फंसे होने की आशंका है।
भारत समेत कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ
आपदा के बाद भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और श्रीलंका समेत कई देशों ने मदद की पेशकश की है। बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने की वजह से अलग-अलग देशों की एजेंसियां अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
भारत के लिए चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि लापता लोगों में करीब 290 भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश-मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्रियों की संख्या भी बताई गई है।
भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा भी दो दिन के लिए बंद
नेपाल में सड़क और सीमा क्षेत्र के हालात का असर भारत-नेपाल परिवहन पर भी पड़ा है। भारी फ्लैश फ्लड के चलते दिल्ली-काठमांडू भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा को 28 और 29 अगस्त के लिए रोक दिया गया है।
दिल्ली परिवहन निगम के मुताबिक दिल्ली-काठमांडू मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने और सुरक्षा को देखते हुए बस सेवा अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया है।
तिब्बत में 555 फंसे पर्यटकों का रेस्क्यू
नेपाल की तरफ तबाही के बीच चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी राहत की खबर आई है। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक तिब्बत में फंसे 555 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन 555 पर्यटकों में किन देशों के नागरिक शामिल हैं और क्या उनका आंकड़ा नेपाल की ओर से जारी प्रभावित या लापता लोगों की संख्या में शामिल है।
यूपी-उत्तराखंड में भी बढ़ी चिंता
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने की आशंका है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
तबाही के बाद सबसे बड़ा सवाल—कितने लोग अभी और मिलेंगे?
नेपाल में पानी का कहर फिलहाल कम जरूर हुआ है, लेकिन असली चुनौती अब मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचने की है। 475 मौतें और 1600 से ज्यादा लापता लोगों का आंकड़ा बताता है कि इस आपदा का पूरा सच अभी सामने आना बाकी है।
राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों और शवों की तलाश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मलबा हटेगा, मौत और लापता लोगों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।












