सिर्फ 1 साल में 99% नौकरियां खत्म? AI को लेकर एक्सपर्ट की डराने वाली भविष्यवाणी ने मचाई हलचल

2045 तक दुनिया पहुंच सकती है ‘नो रिटर्न’ मोड़ पर… AI इंसानों को करेगा पूरी तरह रिप्लेस? जानिए किस सेक्टर पर सबसे बड़ा खतरा और कौन-सी नौकरियां बचेंगी

AI से इंसानों की 99% नौकरियों पर मंडराया खतरा, बेरोज़गारी का स्तर होगा अभूतपूर्व!

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई से लेकर नौकरी, बिजनेस से लेकर रोजमर्रा के काम—हर जगह AI-पावर्ड टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसी बीच AI को लेकर एक ऐसी चेतावनी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ा दी है।

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मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने दावा किया है कि आने वाले महज एक साल के भीतर AI इंसानों की करीब 99 फीसदी नौकरियों को खत्म कर सकता है। उनका कहना है कि AI अब सिर्फ इंसानों का सहायक नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें पूरी तरह रिप्लेस करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


“ऐसा कोई काम नहीं जिसे ऑटोमेट न किया जा सके”

डॉ. याम्पोल्स्की के मुताबिक, “ऐसा कोई भी इंसानी काम नजर नहीं आता, जिसे पूरी तरह ऑटोमेट न किया जा सके।”
उन्होंने चेतावनी दी कि जिस रफ्तार से AI विकसित हो रहा है, उससे जॉब मार्केट में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

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आईटी, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एनालिसिस, कंटेंट क्रिएशन, अकाउंटिंग और यहां तक कि रिसर्च जैसे सेक्टर्स पर भी AI का सीधा असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि आने वाले सालों में होने वाले बदलाव पिछले सभी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन से कहीं ज्यादा गहरे और व्यापक होंगे।


2045: दुनिया का ‘नो रिटर्न’ पॉइंट?

डॉ. याम्पोल्स्की ने आगाह किया है कि 2045 तक दुनिया एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) और ऑटोमेशन के तेजी से विकास को लेकर उन्होंने कहा कि AI सिर्फ मददगार टूल नहीं रहेगा, बल्कि समाज की पूरी संरचना बदल सकता है।

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उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी फैसले इंसानी फैसलों से आगे निकल सकते हैं, जिससे रोजगार, अर्थव्यवस्था और इंसानी नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।

गौरतलब है कि डॉ. रोमन याम्पोल्स्की लातविया के रहने वाले हैं और वर्तमान में अमेरिका की लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। वे AI सेफ्टी और संभावित जोखिमों पर काम करने वाले अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल हैं और 100 से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित कर चुके हैं।


5 साल में फिजिकल लेबर भी होगा ऑटोमेट?

रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि अगले पांच सालों में लगभग हर तरह के फिजिकल लेबर को भी ऑटोमेट किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “मैं 10 प्रतिशत बेरोज़गारी की बात नहीं कर रहा, बल्कि 99 प्रतिशत की बात कर रहा हूं।”

उनके मुताबिक, AI और ऑटोमेशन का असर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लगभग हर सेक्टर में इंसानों की जरूरत कम होती जाएगी। यही वजह है कि आने वाला बदलाव पिछले सभी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन से अलग और कहीं ज्यादा बड़ा साबित हो सकता है।


कौन-सी नौकरियां बचेंगी?

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी।

डॉ. याम्पोल्स्की के अनुसार, भविष्य में वही काम बचेंगे जहां लोग किसी न किसी वजह से इंसानी मौजूदगी चाहते होंगे। उदाहरण के तौर पर, भले ही AI अकाउंटिंग बेहतर तरीके से कर सके, लेकिन कई लोग भरोसे या निजी पसंद की वजह से इंसानी अकाउंटेंट रखना चाहेंगे—खासतौर पर आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग।

इसके अलावा, हाथ से बनी चीजों का एक छोटा लेकिन खास बाजार बना रहेगा। शौक, भावनात्मक जुड़ाव और एक्सक्लूसिविटी की वजह से कुछ कारीगरी और क्रिएटिव नौकरियां बच सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि AI की निगरानी और रेगुलेशन से जुड़ी नौकरियां भविष्य में बनी रह सकती हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय में AI को पूरी तरह कंट्रोल करना शायद संभव न हो, लेकिन इंसानी निगरानी इसकी रफ्तार और असर को कुछ हद तक सीमित कर सकती है।


क्या सच में आने वाला है ‘बेरोज़गारी का युग’?

AI को लेकर यह भविष्यवाणी जहां एक ओर टेक्नोलॉजी की ताकत को दिखाती है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करती है—क्या दुनिया सच में ऐसे दौर में प्रवेश करने वाली है जहां इंसानी नौकरियां लगभग खत्म हो जाएंगी?

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