वीडियो: 8 लेन सड़क दे रही है बीमारी को आमंत्रण.. कंट्रक्शन कंपनी और बिल्डर के मनमाने तरीके से आमजन को हो रही परेशानी…

धनबाद: झारखंड में पहली 8 लेन सड़क धनबाद जिले में गोल बिल्डिंग से कांको तक बनाई जा रही है। जब से ये 8 लेन सड़क बननी शुरू हुई है तब से ये विवादों में ही घिरती नजर आती रही है। कभी सरकार के तरफ से तो, कभी ठेकेदार की मनमानी के कारण।सड़क बनाने वाली कंपनी के ठेकेदार की कार्यशैली भी इसी रहती है जिससे आमजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसकी वजह सरकार के तरफ से तय नियम कानून की मॉनिटरिंग नहीं करना ही हो सकता है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया जब सड़क बनाने वाली कंपनी की कारस्तानी के कारण लोग बीमारी और दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।

झारखंड और अन्य राज्यो में डेंगू महामारी का रूप ले रहा है। मालूम हो की वेक्टर जनित रोग बहुत तेज़ी से फैलता है। इसमें कुछ बीमारी जानलेवा भी होती है जिनमे से एक डेंगू भी है। मच्छर गन्दे जमा पानी में तेज़ी से बढ़ते है और डेंगू का लार्वा साफ जमा पानी मे तेज़ी से फैलते हैं। 8 लेन सड़क के किनारे बसे सम्राट सिटी में कॉलोनी वासी दिन में अनेकों बार सम्राट सिटी के गेट से आना जाना भी करते हैं। कॉलोनी के मेन गेट पर बिल्डर नाली बनाने के लिए बरसो से गड्ढा खोद के रख दिये हैं। जिसमे पानी जमा होकर सड़ रहा है। न तो 8 लेन सड़क से इस नाली का जुड़ाव हुआ है न ही अन्य कोई उपाय। जो दुर्गंध के साथ साथ बीमारी फैलाने का सस्ता साधन बना हुआ है।

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8 लेन बनाने वाले ठेकेदार और उनके स्टाफ मेम्बर्स किस कारण से ये कारस्तानी कर रखे हैं ये बिल्कुल समझ से परे है। जिन्होंने सम्राट सिटी के गेट के बगल में ड्रेन बना कर लगभग 6 माह से खुला छोड़ रखा है। जहाँ गन्दे पानी का जमावड़ा लगा हुआ है। जिसमें मच्छड़ का खान है। ऐसे ठेकेदारों और उनके अभियंताओ के कार्य प्रणाली की समीक्षा प्रशासन के नहीं करने से अपने मनमुताबिक कार्य को अंजाम देते है। कार्य प्रणाली की समीक्षा और मॉनिटरिंग नहीं होने से आमजन की समस्या से कोई लेना देना नही रहता।जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।

जिम्मेदार कौन

सवाल ये की इस तरह के मनमाने कार्य प्रणाली, आमजनता को परेशान करने वाले के लिए जिम्मेवार कौन है? क्या बिल्डर जिन्होंने नाला बनाने के नाम पे बरसों से गड्ढा खोद के रख छोड़ा है और उन्हें कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र दिया जा चुका है, या 8 लेन बनानेवाले ठेकेदार और उनके अभियंता, या फिर कॉलोनी वासी जो अब तक शांत बैठे हैं , या फिर धनबाद प्रशासन जो इन सब के मनमाने कार्यप्रणाली पर अंकुश नहीं लगा पाई। जब जिम्मेवारी तय करने की बात होती है तो जिम्मेवारी स्वास्थ्य विभाग की भी कम नहीं है। क्या स्वास्थ्य विभाग बीमारी फैलने का इंतजार कर रही है उसके बाद एक टीम बना कर खानापूर्ति करने में लग जायेगी। स्वास्थ्य विभाग का काम सिर्फ इलाज करना ही है बल्कि बीमारी फैलानेवाले कारकों के प्रति भी सचेत रहे और वैसे जिम्मेवार की चिन्हित कर कारवाई भी कराए। बदलते समय के साथ स्वास्थ्य विभाग को भी कई कानूनी शक्ति दी गई है,जरूरत है उसे अमलीजामा पहनाने की। इसका ताजा उदाहरण कोरोना महामारी के समय आमजन ने देखा है।

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फूड सेफ्टी विभाग भी रहता है मौन

आए दिन ये सुनने में जरूर आता है की दुकानों की सैंपलिंग की गई। परंतु इसे नियमित करने की जरूरत है। तभी जनता इन सब के प्रति जागरूक बनेंगे। इस विभाग की भूमिका और भी बढ़ जाती है क्योंकि ऐसे गंदगी के बीच एक रेस्टुरेंट फ़ास्ट फ़ूड भी है। जहाँ सैकड़ो लोगों के खान पान का केंद्र हैं। रेस्टुरेट चलाने वाले का भी आसपास की सफाई से कोई वास्ता नहीं रहता। वैसे जिम्मेवारी इनकी भी समान रूप से है कि आसपास साफ सफाई का विशेष ध्यान रखे अन्यथा संबंधित विभाग को सूचित करे। क्योंकि खानपान वाले केंद्र को लाइसेंस निर्गत करने वाली नियम और शर्तों में इस बात का उल्लेख रहता है।

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