Flydubai Pilot Smit Machchhar: ‘आखिरी वक्त में हनुमान चालीसा पढ़ रहा था…’, PM मोदी से बात करते हुए भावुक हुए कैप्टन स्मित, बोले- ‘मैं किसी को मरने नहीं दे सकता था’

फ्लायदुबई फ्लाइट में को-पायलट के हमले में घायल भारतीय कैप्टन ने पीएम मोदी को सुनाई खौफनाक दास्तान, बोले- चोटों के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलना जरूरी था

 

नई दिल्ली: फ्लायदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में को-पायलट के हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉल पर बातचीत की। इस दौरान कैप्टन स्मित ने उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। प्रधानमंत्री ने उनकी हिम्मत, सूझबूझ और संयम की सराहना की।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

PM मोदी से बात करते हुए भावुक हुए कैप्टन स्मित

बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘सबसे बड़ा आदर्श’ बताते हुए कहा कि उनका फोन आना उनके लिए बेहद खास और गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से सीधे बात करने का मौका मिलेगा।

पीएम मोदी ने कैप्टन स्मित से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और मुश्किल हालात में उनके संयम और साहस की प्रशंसा की।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

‘गिर गया था, लेकिन पता था कि नहीं उठा तो लोग मर जाएंगे’

कैप्टन स्मित ने बताया कि हमले के दौरान उन्हें कई गंभीर चोटें आईं और वह नीचे गिर गए थे। लेकिन उन्हें यह एहसास था कि अगर वह उठकर कुछ नहीं करते तो विमान में मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

उन्होंने पीएम मोदी को बताया कि अपने 17 साल के उड़ान अनुभव और 11 साल के कैप्टन के अनुभव के कारण आंखें बंद होने के बावजूद उन्हें अंदाजा था कि विमान के अंदर क्या हो रहा है। इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की आखिरी कोशिश की। दरवाजा खुलने के बाद अन्य लोग भी कॉकपिट में पहुंच सके और स्थिति को संभालने में मदद मिली।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

‘संकट के वक्त हनुमान चालीसा पढ़ रहा था’

बातचीत का सबसे भावुक हिस्सा तब सामने आया, जब कैप्टन स्मित ने बताया कि मुश्किल समय में वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान भी वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे।

उनके मुताबिक, उस समय उनके मन में यही था कि विमान में मौजूद लोगों की जान बचनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हनुमान चालीसा से मानसिक मजबूती मिली।

‘इसका श्रेय सिर्फ मुझे नहीं जाता’

कैप्टन स्मित ने इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय अकेले खुद को देने के बजाय विमान में मौजूद अन्य लोगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संकट के उस वक्त सभी ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई और उन्हें जो करना था, वह उन्होंने किया।

उनकी कोशिश के बाद यात्रियों और क्रू के अन्य सदस्यों को कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला। इसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया।

पीएम मोदी बोले- पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है

प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित की बहादुरी और सूझबूझ की सराहना करते हुए कहा कि पूरा देश उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। पीएम ने उनके परिवार और उनकी मां के संस्कारों का भी उल्लेख किया।

इस बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताया। फ्लायदुबई की इस घटना में विमान तेजी से नीचे आया था और कॉकपिट में हुए संघर्ष के बावजूद विमान की सुरक्षित लैंडिंग संभव हुई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

close