शहीद पिता को देख मासूम बेटा फफक-फफक कर रोया, फिर सैल्यूट देकर कहा, जय हिंद पापा, नजारा देख पूरा गांव रो पड़ा…22 जनवरी को हुई थी शहादत

Seeing his martyred father, the innocent son burst into tears, then saluted and said, Jai Hind Papa. Seeing the scene, the entire village wept... He was martyred on January 22.

Shaheed News : जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए दर्दनाक हादसे में शहीद हुए भोजपुर के वीर सपूत हरेराम कुंवर का अंतिम संस्कार महुली घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सेना ने सलामी दी। बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी, छोटे बेटे ने सैल्यूट कर पिता को अंतिम विदाई दी। भोजपुर जिले के लाल, जवान हरेराम कुंवर (38 वर्ष) आज पंचतत्व में विलीन हो गए।

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भोजपुर के महुली घाट पर उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को जब सेना की टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और दिल गर्व से भर उठा।शहीद जवान के बड़े बेटे प्रियांशु (11 वर्ष) ने कांपते हाथों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। वहीं, 8 वर्षीय छोटे बेटे आदर्श ने अपने पिता को सैल्यूट कर ऐसी विदाई दी, जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों को भावुक कर दिया।

जम्मू-कश्मीर में हुआ था दर्दनाक हादसा
गौरतलब है कि 22 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया था। इस भीषण दुर्घटना में 10 जवान शहीद हो गए, जबकि 11 जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे। सभी जवान ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए तैनाती स्थल की ओर जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

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अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
शहीद के पार्थिव शरीर के महुली घाट पहुंचते ही हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। “भारत माता की जय” और “शहीद हरेराम कुंवर अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा। शहीद के पिता ने अपने बेटे को नमन किया, पुष्प अर्पित किए और फूट-फूट कर रो पड़े। गांव, परिवार और पूरे भोजपुर के लिए यह क्षण असहनीय पीड़ा से भरा था।

भोजपुर का गौरव थे हरेराम कुंवर
शहीद के बड़े भाई जयप्रकाश कुंवर ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे उन्हें छोटे भाई की शहादत की सूचना मिली। यह खबर सुनते ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में हरेराम कुंवर की बहाली दानापुर स्थित बिहार रेजीमेंट में हुई थी। वे शुरू से ही अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और देशभक्ति से ओत-प्रोत जवान थे।

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मां से आख़िरी बातचीत बनी अमूल्य स्मृति
इस हादसे को और भी मार्मिक बनाता है वह तथ्य कि हादसे से कुछ घंटे पहले ही गुरुवार सुबह शहीद जवान की अपनी मां शांति देवी से फोन पर बातचीत हुई थी। मां-बेटे की यह बातचीत अब परिवार के लिए एक अमिट और पीड़ादायक स्मृति बन गई है।

पत्नी बेसुध, गांव में मातम
जैसे ही शहादत की खबर नथमलपुर गांव पहुंची, पूरे गांव में कोहराम मच गया। हर घर में मातम छा गया। शहीद की पत्नी खुशबू देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। उनके दो छोटे बेटे प्रियांशु और पीयूष के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।

दादा पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद के पिता और दादा पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वृद्ध दादा रामगिता कुंवर अपने पोते की शहादत की खबर से गहरे सदमे में हैं। परिजन और ग्रामीण उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस अपार दुख के आगे शब्द भी कम पड़ रहे हैं।

गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक हर आंख नम है। लोग शहीद के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हरेराम कुंवर की शहादत ने नथमलपुर ही नहीं, पूरे भोजपुर जिले को गर्व और गहरे शोक में डुबो दिया है।

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