अपने ही बंगले के आंगन में जिंदा दफना दी गई करोड़ों की मालकिन! 3 साल तक विदेश जाने की कहानी सुनाता रहा पति, जमीन खोदी तो निकला ऐसा राज कि देश दहल गया

Shakereh Khaleeli Murder Mystery: बेंगलुरु की एक आलीशान हवेली… शाही परिवार की वारिस… करोड़ों की संपत्ति और अचानक गायब हुई एक महिला। पति ने दुनिया को बताया कि वह विदेश चली गई हैं। तीन साल तक यह कहानी चलती रही, लेकिन जब पुलिस ने उसी बंगले के आंगन की जमीन खोदी तो जो सामने आया, उसने पूरे देश को हिला दिया।

जमीन के करीब 8 फीट नीचे एक लकड़ी का ताबूत मिला। ताबूत खोला गया तो उसके अंदर शकीरे खलीली का कंकाल बरामद हुआ। जांच आगे बढ़ी तो सामने आई लालच, साजिश और हत्या की ऐसी खौफनाक कहानी, जिसने देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में जगह बना ली।

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कौन थीं शकीरे खलीली?

शकीरे खलीली किसी आम परिवार से नहीं थीं। वह मैसूर के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती थीं और बेहद संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती थीं।

उनके पास बेंगलुरु समेत कई जगहों पर बड़ी संपत्तियां थीं। पहली शादी पूर्व आईएफएस अधिकारी अकबर खलीली से हुई थी। लेकिन बाद में उनकी जिंदगी में मुरली मनोहर मिश्रा नाम का व्यक्ति आया, जो खुद को स्वामी श्रद्धानंद बताता था।

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1985 में शकीरे ने अपने पहले पति को तलाक देकर श्रद्धानंद से शादी कर ली।

यहीं से उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी।

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पति ने कहा- विदेश चली गई हैं, लेकिन बेटी को होने लगा शक

28 अप्रैल 1991 को शकीरे अचानक गायब हो गईं। परिवार और जानने वालों के सामने श्रद्धानंद ने दावा किया कि वह किसी जरूरी काम से विदेश चली गई हैं।

दिन बीतते गए… महीने गुजर गए… लेकिन शकीरे वापस नहीं लौटीं।

उनकी बेटी एस्मेथ खलीली को धीरे-धीरे पिता की कहानी पर शक होने लगा। आखिर एक मां इस तरह अचानक गायब कैसे हो सकती थी?

बेटी की लगातार कोशिशों और पुलिस जांच के बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

बंगले के आंगन में खुदाई हुई तो निकला ताबूत

मई 1994 में पुलिस ने बेंगलुरु स्थित बंगले के आंगन में खुदाई शुरू की।

कुछ देर बाद जमीन के नीचे से एक बड़ा लकड़ी का ताबूत मिला।

जब उसे खोला गया तो अंदर शकीरे का कंकाल मिला। उनके साथ उनके कपड़े और तकिया भी मौजूद थे।

यानी जिस महिला के विदेश जाने की कहानी सुनाई जा रही थी, वह कहीं गई ही नहीं थी। वह उसी घर के आंगन के नीचे दफन थी।

संपत्ति बनी हत्या की सबसे बड़ी वजह?

जांच में पुलिस के सामने श्रद्धानंद की कथित साजिश की तस्वीर सामने आई। उसकी नजर शकीरे की बेशकीमती संपत्तियों पर थी।

बताया गया कि शकीरे के नाम बेंगलुरु, ऊटी और मध्य प्रदेश में बड़ी संपत्तियां थीं। श्रद्धानंद ने कथित तौर पर उनकी संपत्ति पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उसने शकीरे को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

यानी पुलिस के मुताबिक, इस पूरी खौफनाक साजिश के पीछे संपत्ति सबसे बड़ा मकसद था।

चाय में मिलाई नींद की दवा और फिर रची खौफनाक साजिश

जांच के मुताबिक, 28 अप्रैल 1991 की रात श्रद्धानंद ने शकीरे को चाय में कथित तौर पर नींद की दवा दी।

जब वह बेहोश हो गईं तो पहले से तैयार लकड़ी के ताबूत में उन्हें उनके गद्दे समेत रख दिया गया।

इसके बाद बंगले के आंगन में खोदे गए करीब 8 फीट गहरे गड्ढे में ताबूत को उतार दिया गया और उसके ऊपर कंक्रीट डाल दिया गया।

लेकिन इस मामले का सबसे भयावह पहलू फोरेंसिक जांच के दौरान सामने आया।

क्या शकीरे को जिंदा दफन किया गया था?

फोरेंसिक जांच में मिली हड्डियों और अन्य सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने यह दावा किया कि शकीरे को जिंदा दफन किया गया था।

जांच में कथित तौर पर ऐसे निशान मिले जिनसे यह संकेत मिला कि उनके हाथों की उंगलियां गद्दे और ताबूत की लकड़ी से संघर्ष कर रही थीं।

अगर यह निष्कर्ष सही है, तो इसका मतलब था कि जिस वक्त उन्हें जमीन के नीचे दफनाया गया, उस समय उनकी सांसें चल रही थीं।

यही इस हत्याकांड का सबसे रोंगटे खड़े कर देने वाला हिस्सा माना गया।

गिरफ्तारी के बाद खुलने लगे साजिश के राज

मई 1994 में श्रद्धानंद को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसके खिलाफ मुकदमा चला।

ट्रायल कोर्ट और बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 2008 में शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा को बदलकर पूरी जिंदगी जेल में रहने की सजा में तब्दील कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बदली फांसी की सजा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत सामने रखा। अदालत ने माना कि कुछ मामलों में सामान्य उम्रकैद और मृत्युदंड के बीच एक तीसरा विकल्प भी होना चाहिए।

ऐसे मामलों में दोषी को पूरी जिंदगी जेल में रखा जा सकता है और सामान्य समय से पहले रिहाई का लाभ नहीं दिया जाता।

शकीरे खलीली हत्याकांड इसी तरह की सजा के लिए भारतीय न्यायिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया।

30 साल बाद भी क्यों याद किया जाता है यह मामला?

शकीरे खलीली हत्याकांड सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं थी। इसमें शाही परिवार, अकूत संपत्ति, कथित ढोंगी बाबा, विश्वासघात और जमीन के नीचे छिपी लाश जैसे ऐसे पहलू थे, जिन्होंने इसे देश के सबसे चर्चित अपराध मामलों में शामिल कर दिया।

एक महिला जो करोड़ों की संपत्ति की मालकिन थीं, अपने ही घर में गायब हो गईं और परिवार को वर्षों तक उनके विदेश जाने की कहानी सुनाई जाती रही।

लेकिन जब उसी घर की जमीन खोदी गई, तो तीन साल पुराना सबसे बड़ा राज ताबूत के अंदर से बाहर आया।

और इस हत्याकांड ने एक ऐसा सवाल छोड़ दिया—आखिर लालच इंसान को किस हद तक गिरा सकता है?

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