ठंडा पानी पीते ही गला खराब? रात में दही खाने से जुकाम? AIIMS के न्यूरोसर्जन ने बताए इन 5 बड़े हेल्थ मिथकों के पीछे छिपे सच

Health Myths: बचपन से हम हेल्थ को लेकर कई ऐसी बातें सुनते आ रहे हैं, जिन पर बिना ज्यादा सोचे भरोसा भी कर लेते हैं। जैसे ठंडा पानी पीने से गला खराब हो जाता है, गीले बालों के साथ बाहर निकलने से सर्दी हो जाती है या रात में दही खाने से कफ बढ़ता है। लेकिन क्या वाकई इन बातों के पीछे विज्ञान है? या फिर ये सिर्फ ऐसे हेल्थ मिथक हैं, जिन्हें हम पीढ़ियों से सच मानते आ रहे हैं?
AIIMS के न्यूरोसर्जन डॉक्टर आमिर खान के मुताबिक, हेल्थ से जुड़े कई लोकप्रिय दावों की हकीकत हमारी आम धारणा से अलग हो सकती है। हालांकि, किसी भी बीमारी या लगातार बने लक्षणों के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
ठंडा पानी पीने से सच में खराब होता है गला?
सबसे आम मिथकों में से एक है कि ठंडा पानी पीने से गला खराब हो जाता है। लेकिन ठंडा पानी सीधे तौर पर वायरल सर्दी-जुकाम या गले के संक्रमण की वजह नहीं बनता।
कॉमन कोल्ड वायरस के कारण होता है। इसलिए सिर्फ ठंडा पानी पीने को इसका कारण मानना सही नहीं है।
हां, अगर किसी व्यक्ति का गला पहले से खराब है या उसे ठंडी चीजों से परेशानी होती है, तो ठंडा पानी पीने से उसे असहजता या लक्षण ज्यादा महसूस हो सकते हैं।
गीले बालों के साथ बाहर निकलने से हो जाती है सर्दी?
कई घरों में बच्चों को अक्सर कहा जाता है कि गीले बाल लेकर बाहर मत जाना, वरना सर्दी-जुकाम हो जाएगा। लेकिन गीले बाल अपने आप कॉमन कोल्ड नहीं करते।
सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है। गीले बाल किसी वायरस को शरीर में प्रवेश नहीं कराते। हालांकि, ठंडे मौसम में गीले बालों के कारण शरीर को ज्यादा ठंड महसूस हो सकती है और असहजता बढ़ सकती है।
यानी गीले बाल और वायरल सर्दी के बीच सीधा कारण-परिणाम वाला संबंध नहीं है।
रात में दही खाने से बढ़ता है कफ?
रात में दही खाने को लेकर भी लोगों के बीच काफी भ्रम है। लेकिन दही खाने से सीधे सर्दी-जुकाम होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
कॉमन कोल्ड वायरस से होता है, जबकि दही एक डेयरी फूड है। अगर किसी व्यक्ति को डेयरी उत्पाद से एलर्जी या संवेदनशीलता है, तो उसे दही खाने के बाद कुछ परेशानी हो सकती है। लेकिन सिर्फ रात में दही खाने को सर्दी-जुकाम की सीधी वजह मानना सही नहीं है।
पेन किलर खाई और दर्द हमेशा के लिए गायब?
दर्द होने पर अक्सर लोग तुरंत पेन किलर ले लेते हैं और मान लेते हैं कि इससे समस्या खत्म हो गई। लेकिन यहां भी एक जरूरी अंतर समझना चाहिए।
पेन किलर दर्द को कम कर सकती है, लेकिन दर्द के पीछे मौजूद मूल कारण को हमेशा खत्म नहीं करती। उदाहरण के लिए लगातार सिरदर्द, पेट दर्द या शरीर के किसी हिस्से में बार-बार होने वाले दर्द के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
इसलिए अगर दर्द बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना हुआ है तो सिर्फ दवा लेकर उसे दबाने के बजाय कारण का पता लगाना जरूरी है।
नाक से हरा-पीला म्यूकस आया तो बैक्टीरियल इंफेक्शन?
यह भी एक ऐसा मिथक है, जिसे लोग बहुत आसानी से सच मान लेते हैं। नाक से निकलने वाले म्यूकस का रंग हरा या पीला होने का मतलब हर बार बैक्टीरियल इंफेक्शन होना नहीं है।
म्यूकस का रंग बदलने के कई कारण हो सकते हैं। सिर्फ उसके रंग के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को बैक्टीरियल इंफेक्शन है या उसे एंटीबायोटिक की जरूरत है।
इसलिए हरा या पीला म्यूकस देखकर खुद से एंटीबायोटिक लेना सही तरीका नहीं है।
हर सुनी-सुनाई हेल्थ बात को सच मानना कितना सही?
हेल्थ से जुड़ी सलाह में सबसे बड़ी परेशानी यही है कि कई बातें हमें परिवार और समाज से लंबे समय से सुनने को मिलती हैं और धीरे-धीरे वे हमें सच लगने लगती हैं। लेकिन हर लोकप्रिय धारणा वैज्ञानिक तथ्य हो, यह जरूरी नहीं।
ठंडा पानी, गीले बाल, रात का दही, पेन किलर और म्यूकस का रंग—इन पांचों को लेकर आम धारणाएं और वैज्ञानिक नजरिया कई जगह अलग हैं।
इसलिए किसी बीमारी के लक्षण बने रहने पर इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।












