“इतना कौन सोता है?” अगर रोज सुनते हैं ये ताने तो हो जाएं सावधान! कहीं आप भी Sleep Shaming के शिकार तो नहीं?

Sleep Shaming: नींद को लेकर मिलने वाले ताने सिर्फ मजाक नहीं, आपकी सेहत पर डाल सकते हैं असर; जानिए कैसे पहचानें और बचें

नई दिल्ली: “कितना सोते हो?”, “हर वक्त सोते ही रहते हो”, “सूरज निकल आया, अब तो उठ जाओ”, “दोपहर में भी कोई सोता है क्या?”… अगर आपको भी नींद को लेकर ऐसी बातें सुननी पड़ती हैं तो हो सकता है कि आप Sleep Shaming यानी स्लीप शेमिंग का सामना कर रहे हों।

अक्सर इन बातों को मजाक या सामान्य ताने के तौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन लगातार किसी व्यक्ति को उसकी नींद के लिए शर्मिंदा करना या उसे पर्याप्त नींद लेने से रोकना उसकी नींद की आदतों और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल सकता है।

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क्या होती है Sleep Shaming?

जब किसी व्यक्ति को ज्यादा सोने के लिए बार-बार टोका जाए, उसकी नींद का मजाक बनाया जाए या उसे यह महसूस कराया जाए कि पर्याप्त नींद लेना गलत है, तो इसे Sleep Shaming कहा जाता है।

कई बार लोग खुद भी अपनी नींद की जरूरत को दूसरों से तुलना करने लगते हैं। जैसे कोई कहता है, “मैं तो सिर्फ 4-5 घंटे सोता हूं”, तो दूसरा व्यक्ति अपनी नींद को लेकर अपराधबोध महसूस करने लगता है।

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समस्या तब बढ़ती है जब इस तरह के सामाजिक दबाव के कारण व्यक्ति अपनी जरूरत के मुताबिक नींद लेना कम कर देता है।

कहीं आपके साथ भी तो नहीं हो रहा ऐसा?

अगर नीचे दी गई बातें आपके साथ बार-बार होती हैं, तो आपको अपनी नींद और आसपास के लोगों के व्यवहार पर ध्यान देने की जरूरत है:

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  • आपको सोने के लिए बार-बार ताने सुनने पड़ते हैं।
  • कोई आपके सामने यह बताकर खुद की तारीफ करता है कि वह सिर्फ 4-5 घंटे सोता है।
  • आपकी नींद की जरूरत को नजरअंदाज करके लगातार प्लान बनाए जाते हैं।
  • आपको ज्यादा सोने के लिए गिल्ट महसूस कराया जाता है।
  • आपकी नींद तोड़ने के लिए जानबूझकर दरवाजा जोर से बंद करना, लाइट या पंखा बंद करना जैसी हरकतें की जाती हैं।
  • आपको यह महसूस कराया जाता है कि ज्यादा सोना आलस की निशानी है।

इनमें से कई बातें लगातार हो रही हैं तो यह Sleep Shaming का संकेत हो सकता है।

नींद पूरी न होने से क्या हो सकता है नुकसान?

लगातार नींद कम होने से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित हो सकते हैं। नींद की कमी के कारण:

तनाव बढ़ सकता है

पर्याप्त नींद न मिलने पर व्यक्ति दिनभर थका और चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है। इससे तनाव बढ़ने की समस्या हो सकती है।

इम्यून सिस्टम पर असर

नींद शरीर की रिकवरी और सामान्य कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। लगातार नींद की कमी प्रतिरक्षा तंत्र के कामकाज पर असर डाल सकती है।

मूड और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित

नींद की कमी का संबंध मूड में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से भी हो सकता है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने पर चिंता और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

फोकस और काम करने की क्षमता घट सकती है

नींद पूरी नहीं होने पर ध्यान केंद्रित करने, चीजों को याद रखने और रोजमर्रा के कामों में बेहतर प्रदर्शन करने में परेशानी हो सकती है।

हर व्यक्ति को एक जैसी नींद की जरूरत नहीं

सबसे जरूरी बात यह समझना है कि नींद की जरूरत हर व्यक्ति में बिल्कुल एक जैसी नहीं होती।

किसी व्यक्ति को कम नींद में भी आराम महसूस हो सकता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति को अधिक नींद की जरूरत हो सकती है। इसलिए अपनी नींद की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से करना सही तरीका नहीं है।

अगर आपको पर्याप्त आराम के लिए 8 घंटे की नींद की जरूरत महसूस होती है, तो सिर्फ इसलिए अपनी नींद कम नहीं करनी चाहिए क्योंकि कोई दूसरा व्यक्ति 5-6 घंटे में ही सोकर उठ जाता है।

Sleep Shaming से कैसे बचें?

इससे बचने के लिए सबसे पहले अपनी नींद की जरूरत और दिनचर्या को समझना जरूरी है।

  • अपनी नींद को भी रोजमर्रा की प्राथमिकता बनाएं।
  • अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
  • दूसरों से अपनी नींद की तुलना न करें।
  • परिवार और दोस्तों को अपनी नींद की जरूरत के बारे में स्पष्ट बताएं।
  • जरूरत पड़ने पर अपनी personal boundaries तय करें।
  • अगर लगातार पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिनभर अत्यधिक नींद या थकान रहती है, तो डॉक्टर या नींद विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

नींद आलस नहीं, शरीर की जरूरत है

नींद को लेकर हर व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए किसी को ज्यादा सोने के लिए शर्मिंदा करना या उसकी नींद को लगातार बाधित करना सही नहीं है।

अपनी नींद को लेकर गिल्ट महसूस करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर और दिमाग की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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