10 साल की उम्र में बना ली राष्ट्रीय पहचान! ‘रबर डॉल’ हर्षिका के हैरतअंगेज योगासन देख लोग रह जाते हैं दंग

पांच साल की उम्र से शुरू किया योग, अब 40 से ज्यादा मेडल जीतकर देशभर में बटोर रही हैं सुर्खियां

हल्द्वानी। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और मनोरंजन में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में हल्द्वानी की नन्ही प्रतिभा हर्षिका रिखाड़ी अपनी अद्भुत योग कला से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं। अपने असाधारण लचीलेपन और कठिन से कठिन योगासन को सहजता से करने की क्षमता के कारण हर्षिका को लोग प्यार से ‘रबर डॉल’ के नाम से जानते हैं।

महज पांच साल की उम्र से योग की दुनिया में कदम रखने वाली हर्षिका आज कई बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं और लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

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योग की दुनिया में कम उम्र में बड़ा मुकाम

देवलचौड़ क्षेत्र निवासी हर्षिका रिखाड़ी वर्तमान में जस गोविन पब्लिक स्कूल में कक्षा पांचवीं की छात्रा हैं। छोटी उम्र में ही उन्होंने योग के क्षेत्र में ऐसी पहचान बनाई है, जो कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

वर्तमान में हर्षिका अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ की ‘ब्रांड एंबेसडर किड्स’ के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी उपलब्धियों ने न केवल परिवार बल्कि पूरे शहर का नाम रोशन किया है।

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40 से ज्यादा मेडल और 25 गोल्ड पर कब्जा

पिछले तीन वर्षों से लगातार योग का अभ्यास कर रही हर्षिका ने जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। अब तक वह योग के क्षेत्र में 40 से अधिक मेडल और ट्रॉफियां अपने नाम कर चुकी हैं।

इनमें 25 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं, जो उनकी मेहनत और समर्पण की कहानी बयां करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई है।

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रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज है नाम

हर्षिका की उपलब्धियां सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं हैं। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में उनका नाम ‘टॉप 21 इंडियन इंस्पायरिंग योगिस’ की सूची में दर्ज किया गया। इसके अलावा उन्हें योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

एक साल की उम्र से शुरू हुआ सफर

हर्षिका की मां मोनिका रिखाड़ी बताती हैं कि बेटी को बचपन से ही योग में रुचि थी। उसकी प्रतिभा को पहचानते हुए परिवार ने उसे बहुत छोटी उम्र से योग प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया।

हर्षिका का कहना है कि योग सीखने के बाद उनकी रुचि लगातार बढ़ती गई और अब वह हर दिन नियमित अभ्यास करती हैं। कठिन आसनों को सीखना और उन्हें बेहतर तरीके से करना उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है।

बच्चों के लिए बन रही प्रेरणा

योग प्रशिक्षकों का मानना है कि कम उम्र से योग करने से बच्चों में शारीरिक लचीलापन, मानसिक एकाग्रता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित होता है। हर्षिका की सफलता इसी का उदाहरण है।

आज हर्षिका न केवल अपने शहर की पहचान बन चुकी हैं, बल्कि हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा भी हैं। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि यदि लगन, मेहनत और परिवार का सहयोग मिले तो छोटी उम्र में भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है।

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