आज रथ पर सवार होकर मंदिर से बाहर आएंगे महाप्रभु! आखिर हर साल 9 दिन के लिए क्यों जाते हैं गुंडिचा मंदिर? जानिए रहस्य

पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा का शुभारंभ, लाखों श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब; जानें तीनों रथों का महत्व और इस दिव्य यात्रा का आध्यात्मिक संदेश।

पुरी। ओडिशा की धर्मनगरी पुरी में गुरुवार से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का भव्य शुभारंभ हो गया। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर आयोजित होने वाली इस दिव्य यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देते हैं और गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं।

इस वर्ष रथयात्रा का महत्व और भी विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इसे अत्यंत पुण्यदायी अवसर मान रहे हैं।

आखिर भगवान हर साल गुंडिचा मंदिर क्यों जाते हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ हर वर्ष अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर, जाते हैं। वहां वे नौ दिनों तक विराजमान रहते हैं। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, भोग और सेवा की जाती है। गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की जन्मस्थली भी माना जाता है। नौ दिन बाद भगवान बहुदा यात्रा के माध्यम से अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं।

रथयात्रा का पूरा कार्यक्रम

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, रथ खींचने की मुख्य रस्म गुरुवार शाम 4 बजे शुरू होगी। लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचकर इस पावन परंपरा का हिस्सा बनेंगे। 24 जुलाई को बहुदा यात्रा (वापसी यात्रा) निकलेगी, जबकि 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे के साथ भगवान पुनः श्रीमंदिर में विराजमान होंगे।

तीनों रथों का अपना अलग महत्व

हर वर्ष भगवान के तीनों रथ विशेष नीम की लकड़ी से तैयार किए जाते हैं और इनमें लोहे की एक भी कील का उपयोग नहीं किया जाता।

  • तालध्वज – भगवान बलभद्र का रथ (लाल-हरा रंग)
  • दर्पदलन (पद्मरथ) – देवी सुभद्रा का रथ (नीला-काला रंग)
  • नंदिघोष – भगवान जगन्नाथ का रथ (लाल-पीला रंग)

रथयात्रा क्यों है इतनी विशेष?

सनातन परंपरा में विश्वास है कि श्रद्धा से भगवान के रथ की रस्सी खींचने या उसे स्पर्श करने मात्र से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता सामाजिक समरसता है, जहां जाति, वर्ग और पद का कोई भेद नहीं रहता। हर श्रद्धालु स्वयं को भगवान का सेवक मानकर एक साथ रथ खींचता है।

रथयात्रा के दौरान पुरी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की तैनाती, मेडिकल कैंप, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। भगवान जगन्नाथ की यह दिव्य यात्रा आस्था, समानता, सेवा और मानवता का संदेश देती है, जो हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती है।

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