देश में पहली बार घटे ग्रेजुएशन एडमिशन! AISHE रिपोर्ट ने खोला बड़ा राज, वजह जानकर चौंक जाएंगे
क्या युवाओं का कॉलेज से उठ रहा भरोसा? AISHE रिपोर्ट में सामने आई हैरान करने वाली तस्वीर

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहली बार ऐसा ट्रेंड सामने आया है जिसने शिक्षा जगत की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा मंत्रालय की ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट (UG) पाठ्यक्रमों में दाखिले की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि पोस्ट ग्रेजुएट (PG) और पीएचडी पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती सोच, रोजगार की चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बड़े बदलावों का संकेत है।
AISHE रिपोर्ट में क्या सामने आया?
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में यूजी कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1 लाख कम हो गई।
इसके बावजूद कुल उच्च शिक्षा नामांकन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- 2022-23: 4.46 करोड़ छात्र
- 2023-24: 4.50 करोड़ छात्र
- छात्राओं की संख्या 2.18 करोड़ से बढ़कर 2.24 करोड़ हुई।
- 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) 29.5 से बढ़कर 30 हो गया।
आखिर क्यों घट रहे हैं यूजी एडमिशन?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अहम वजहें हैं।
पूर्व यूजीसी अध्यक्ष प्रो. सुखदेव थोराट का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्कूल स्तर से ही कौशल आधारित शिक्षा (Skill Education) पर जोर दिया जा रहा है। अब बड़ी संख्या में छात्र पारंपरिक डिग्री की बजाय स्किल आधारित और व्यावसायिक कोर्स चुन रहे हैं।
इसके अलावा चार वर्षीय ग्रेजुएशन, मल्टीपल एग्जिट सिस्टम और कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) जैसी नई व्यवस्थाओं का भी दाखिलों पर असर पड़ा है। मल्टीपल एग्जिट सिस्टम के कारण कई छात्र बीच में ही सर्टिफिकेट या डिप्लोमा लेकर पढ़ाई छोड़ रहे हैं।
महंगी फीस और बंद हुई छात्रवृत्तियां भी बनी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी फंडिंग में कमी और कई छात्रवृत्ति योजनाओं के बंद होने से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उच्च शिक्षा पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गई है।
बताया गया है कि राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (NTSE), लड़कियों की प्रोत्साहन योजना, बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति और मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप जैसी कई योजनाओं के बंद होने का असर भी छात्रों पर पड़ा है।
युवाओं की सोच भी तेजी से बदल रही है
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. फुरकान कमर का कहना है कि आज के युवा केवल डिग्री के भरोसे करियर नहीं बनाना चाहते। उन्हें लगता है कि महंगी पढ़ाई के बाद भी नौकरी की गारंटी नहीं है।
यही वजह है कि बड़ी संख्या में छात्र स्किल डेवलपमेंट, प्रोफेशनल ट्रेनिंग और वैकल्पिक करियर विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
क्या है इसका बड़ा संकेत?
AISHE रिपोर्ट बताती है कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब छात्रों का फोकस सिर्फ डिग्री हासिल करने पर नहीं, बल्कि ऐसे कोर्स चुनने पर है जो उन्हें जल्दी रोजगार और बेहतर करियर के अवसर दिला सकें। वहीं, बढ़ती फीस और आर्थिक चुनौतियां भी उच्च शिक्षा तक पहुंच को प्रभावित कर रही हैं।









