झारखंड: 17 साल बाद छोड़ी बंदूक! लाखों की इनामी महिला नक्सली ने किया सरेंडर, आखिर क्यों बदला अपना फैसला?
भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबीता ने झारखंड पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण। पुनर्वास योजना और लगातार चल रहे अभियान को बताया बड़ा कारण।

झारखंड: राज्य में नक्सल विरोधी अभियान के बीच झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबीता ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बताया जा रहा है कि वह झारखंड सरकार की “नई दिशा–एक नई पहल” पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है।
गिरिडीह पुलिस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अनिता किस्कू ने पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सरेंडर किया। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने उसका स्वागत किया और सरकार की पुनर्वास नीति की जानकारी देते हुए सामान्य जीवन शुरू करने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संगठन के भीतर कथित शोषण, सुरक्षा बलों के लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और सरकार की पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर अनिता ने हथियार छोड़ने का फैसला किया। उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा जताई है।
2009 में हुई थी संगठन में शामिल
पुलिस के मुताबिक, अनिता किस्कू वर्ष 2009 में नक्सली संगठन से जुड़ी थी और बाद में भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य बनी। उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, पुलिस पर हमला, विस्फोटक अधिनियम, यूएपीए, आर्म्स एक्ट समेत कई अन्य आपराधिक मामले शामिल हैं।
अन्य नक्सलियों को भी मिल सकता है संदेश
पुलिस का मानना है कि अनिता किस्कू के आत्मसमर्पण से नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि उसके इस फैसले से अन्य नक्सली भी प्रेरित होंगे और हथियार छोड़कर शांति तथा विकास की राह चुनेंगे।









