PM मोदी की फ्री ऑनलाइन कोचिंग से कितने बच्चों को मिलेगा फायदा? सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
देश में करीब 27% बच्चे लेते हैं प्राइवेट कोचिंग, शहरों और गांवों के खर्च में भी बड़ा अंतर; 15 अगस्त के ऐलान के बाद बदल सकता है पढ़ाई का तरीका

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से युवाओं के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने की बात कही। इस ऐलान के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर देश में कितने बच्चे प्राइवेट कोचिंग लेते हैं और परिवारों को इसके लिए कितना खर्च करना पड़ता है?
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो कोचिंग का दायरा काफी बड़ा है। शिक्षा मंत्रालय के सर्वे के मुताबिक, देश में करीब 27 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट कोचिंग लेते हैं। ऐसे में सरकार की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की योजना बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए अहम साबित हो सकती है।
पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में युवाओं को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि आज कोचिंग की बढ़ती लागत गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। कई माता-पिता स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बड़ी रकम खर्च करते हैं।
सरकार का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण तैयारी की सुविधा पहुंचाना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते।
देश में कितने बच्चे लेते हैं प्राइवेट कोचिंग?
शिक्षा मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश के करीब 27 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट कोचिंग लेते हैं। यह सर्वे देशभर के 52,085 परिवारों और 57,742 छात्रों के बीच किया गया था।
आंकड़े यह भी बताते हैं कि कोचिंग का चलन शहरी इलाकों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा है।
- शहरी क्षेत्रों में: करीब 30.7% बच्चे प्राइवेट कोचिंग लेते हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में: करीब 25.5% बच्चे प्राइवेट कोचिंग लेते हैं।
यानी शहरों में कोचिंग लेने वाले बच्चों का अनुपात गांवों के मुकाबले अधिक है।
शहर और गांव में कोचिंग का खर्च कितना?
कोचिंग पर होने वाला खर्च भी परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में परिवार बच्चों की कोचिंग फीस पर औसतन करीब 3,988 रुपये खर्च करते हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह औसत खर्च करीब 1,793 रुपये है।
यह अंतर बताता है कि महंगी कोचिंग का बोझ खास तौर पर उन परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है जिनकी आमदनी सीमित है।
ऑनलाइन कोचिंग से छोटे शहरों और गांवों के बच्चों को फायदा
प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है, जो बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग नहीं कर सकते।
ऑनलाइन माध्यम के जरिए ऐसे छात्र घर बैठे मोबाइल, कंप्यूटर या अन्य डिजिटल डिवाइस से पढ़ाई कर सकेंगे। इससे उन्हें बड़े कोचिंग संस्थानों तक पहुंचने के लिए शहर बदलने या अतिरिक्त रहने-खाने का खर्च उठाने की जरूरत कम हो सकती है।
युवाओं के लिए क्यों अहम है यह घोषणा?
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए विद्यार्थी अक्सर स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई के साथ अतिरिक्त कोचिंग लेते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह खर्च कई बार बड़ा बोझ बन जाता है।
ऐसे में अगर सरकार की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इसका फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकता है जिनके पास प्रतिभा और मेहनत तो है, लेकिन महंगी कोचिंग के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की यह मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग कब शुरू होगी, किन प्रतियोगी परीक्षाओं को इसमें शामिल किया जाएगा और कितने विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा? इन सवालों के जवाब योजना के विस्तृत स्वरूप और आधिकारिक दिशा-निर्देश सामने आने के बाद स्पष्ट होंगे।











