त्योहारों से पहले चीनी के दाम ने बढ़ाई टेंशन, खरगे ने सरकार से पूछ डाले 3 बड़े सवाल… बोले- ‘ये कैसा आत्मनिर्भर भारत?’

Sugar Price Hike: त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। खरगे ने दावा किया कि देश में चीनी का भंडार करीब नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है और अब भारत को 10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने की जरूरत पड़ रही है।
खरगे ने सवाल उठाया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी? उन्होंने सरकार की E20 नीति यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को लेकर भी सवाल उठाए।
खरगे ने सरकार से पूछे 3 बड़े सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर सरकार से सवाल किया कि आखिर चीनी का भंडार नौ साल के सबसे निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया और देश को चीनी आयात करने की नौबत क्यों आई?
उन्होंने यह भी पूछा कि जब त्योहारों से पहले चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, तो इस महंगाई का बोझ आखिर आम जनता क्यों उठाए?
खरगे ने तीसरा सवाल एथेनॉल नीति को लेकर उठाया। उनका तर्क है कि एक तरफ चीनी का उत्पादन और भंडार कम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने से एथेनॉल बनाकर उसे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। ऐसे में सरकार E20 नीति की समीक्षा क्यों नहीं कर रही?
‘तीन महीने में करीब 40 फीसदी महंगी हो गई चीनी’
खरगे ने दावा किया कि पिछले तीन महीने में चीनी की कीमत करीब 40 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने त्योहारों से पहले कीमतों में इस बढ़ोतरी को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पहले चीनी का उत्पादन घटा, फिर इसका भंडार नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया और अब भारत को विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत पड़ रही है।
उन्होंने इसी क्रम में तंज कसते हुए सवाल किया—“ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है?”
सरकार ने कहा- चीनी महंगी हुई, लेकिन वजह एथेनॉल नहीं
वहीं केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को स्वीकार किया है, लेकिन इसे एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ने से इनकार किया है।
मंत्रालय के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की खुदरा कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
सरकार का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं और इसे सिर्फ एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है।
सरकार ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब
मंत्रालय ने बताया कि एथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गया है।
सरकार के मुताबिक, देश में एथेनॉल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से होता है। ऐसे में सरकार ने खरगे के इस तर्क को खारिज किया कि चीनी के एथेनॉल में इस्तेमाल होने की वजह से ही बाजार में चीनी की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
त्योहारों से पहले चीनी की कीमत पर सियासत तेज
त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयों और अन्य पकवानों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे आम परिवारों के बजट को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से कांग्रेस ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार की आर्थिक और कृषि नीतियों से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को सिर्फ E20 नीति से जोड़ना सही नहीं है। अब देखना होगा कि त्योहारों से पहले चीनी के दाम पर सरकार क्या कदम उठाती है और आम लोगों को बढ़ी कीमतों से कितनी राहत मिलती है।












