JPSC-CGL घोटाले में बड़ा ट्विस्ट: मुख्य संदिग्ध अभय तिवारी CID रिमांड पर, पत्नी और भाई से भी होगी पूछताछ; अब खुलेगा पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का राज?

परीक्षा कराने वाली एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर पर CID की कड़ी नजर, तीन दिन तक होगी पूछताछ; अब तक 25 गिरफ्तार, 37 से ज्यादा संदिग्धों और आरोपियों के बयान दर्ज, जांच में कई अहम कड़ियां जुड़ने का दावा

Ranchi News: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े की जांच अब और तेज हो गई है। मामले में मुख्य संदिग्ध बताए जा रहे अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को CID ने रिमांड पर लिया है। इसके साथ ही उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी से भी कथित परीक्षा अनियमितताओं के सिलसिले में पूछताछ की जा रही है।

अभय तिवारी को CID मुख्यालय में अगले तीन दिनों तक पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का नेटवर्क कैसे काम करता था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और अभ्यर्थियों तक परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी या कथित प्रश्नपत्र कैसे पहुंचता था।

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परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़ा है अभय तिवारी का कनेक्शन

अभय कुमार तिवारी को इस पूरे मामले में इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वह JPSC की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर बताया गया है।

CID की जांच में अब उसके कथित संपर्कों और भूमिका को खंगाला जा रहा है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से जुड़ी व्यवस्था में उसकी पहुंच कितनी थी और क्या इसी के जरिए कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

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22 जुलाई को हुई थी अभय की गिरफ्तारी

CID ने 22 जुलाई को अभय तिवारी को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी गोड्डा जिले में JPSC मेधा घोटाले की जांच के दौरान हुई थी।

बताया गया है कि अभय तिवारी गोड्डा जिले के पौड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर भी तैनात रह चुका है। JPSC सिविल सर्विस मामले में CID उससे पहले भी दो बार पूछताछ कर चुकी है।

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इस बार उसे JSSC CGL मामले में रिमांड पर लिया गया है।

पत्नी और भाई भी CGL मामले में गिरफ्तार

अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को भी JSSC CGL परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों की गिरफ्तारी 18 अगस्त को हुई थी।

अब CID की SIT तीनों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि तीनों के बीच क्या कनेक्शन था और कथित परीक्षा फर्जीवाड़े में उनकी क्या भूमिका रही।

अब तक 25 गिरफ्तार, 37 से ज्यादा लोगों से पूछताछ

CID के अनुसार, झारखंड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान SIT ने अब तक कई संदिग्धों और आरोपियों से पूछताछ की है।

मामले में अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके अलावा 18 अन्य संदिग्धों को नोटिस जारी कर पूछताछ की गई है।

CID की SIT अब तक 37 से ज्यादा संदिग्धों और आरोपियों के बयान दर्ज कर चुकी है। ऐसे में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

तीन दिन की रिमांड में CID खोजेगी कई सवालों के जवाब

अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान CID मुख्य रूप से कथित परीक्षा फर्जीवाड़े के नेटवर्क को समझने की कोशिश करेगी।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि—

  • परीक्षा में कथित गड़बड़ी की योजना कैसे तैयार हुई?
  • इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे?
  • परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किस तरह बाहर पहुंची?
  • अभ्यर्थियों तक कथित प्रश्नपत्र या जानकारी कैसे पहुंचाई गई?
  • परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों की इसमें क्या भूमिका थी?
  • इस पूरे नेटवर्क में अभय तिवारी और उसके परिवार के सदस्यों की कथित भूमिका क्या रही?

इन सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं।

JPSC सिविल सर्विस मामले में भी तीन अभ्यर्थी जेल भेजे गए

इधर, CID ने JPSC की 14वीं प्रतियोगिता परीक्षा में अनुचित माध्यम से सफल बताए गए तीन अभ्यर्थियों को पांच दिनों की रिमांड पर पूछताछ के बाद शनिवार को जेल भेज दिया।

इन आरोपियों में उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा शामिल हैं। तीनों की पांच दिनों की पुलिस रिमांड शनिवार को समाप्त हो गई, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।

अब जांच की सबसे अहम कड़ी पर नजर

JPSC और JSSC से जुड़ी कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच अब लगातार आगे बढ़ रही है। एक तरफ गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर CID की पूछताछ में नए संदिग्धों और कथित नेटवर्क की कड़ियां तलाशने की कोशिश की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभय तिवारी से तीन दिनों की पूछताछ में CID को क्या जानकारी मिलती है और क्या इससे JSSC CGL के कथित पेपर लीक नेटवर्क के उन चेहरों तक पहुंचा जा सकेगा, जो अब तक जांच से बाहर हैं?

आने वाले दिनों में CID की जांच इस मामले में कई बड़े खुलासे कर सकती है।

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