JPSC-JSSC गड़बड़ी: अभय तिवारी के ‘गुरु’ तक पहुंची CID की जांच, कारोबार से पैसों के लेनदेन तक खुलेंगे कई राज?

Ranchi News: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार नए लोगों और कारोबारी नेटवर्क तक पहुंचते नजर आ रहे हैं। अब CID की नजर अभय तिवारी के कथित ‘गुरु’ मिथिलेश सिंह के कारोबार, कंपनियों, संपत्तियों और पैसों के लेनदेन पर है। जांच एजेंसी कई राज्यों में जाकर यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का परीक्षा से जुड़े लोगों और कथित गड़बड़ी से कोई संबंध है या नहीं।
रांची। JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रही CID जांच का दायरा अब लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसी अब अभय तिवारी के कथित गुरु मिथिलेश सिंह के कारोबारी नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है।
CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मिथिलेश सिंह की अलग-अलग कंपनियों, कारोबार, संपत्तियों और परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच कोई कनेक्शन रहा है या नहीं। जांच में कई कंपनियों के नाम सामने आने के बाद अब इनके कारोबारी रिकॉर्ड और आर्थिक गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है।
कई कंपनियां जांच के घेरे में
जांच के दौरान ICN India Private Limited समेत कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा DA Urban Nomads Community Private Limited, Piggy Ventures Private Limited, Hackpackt Homtels Private Limited और DooperSuper Ecosystem Seeds Private Limited से मिथिलेश सिंह के कथित कारोबारी संबंधों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
CID इन कंपनियों की कारोबारी गतिविधियों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बीच संपर्कों की पड़ताल कर रही है। जांच का अहम बिंदु यह है कि कहीं इन कारोबारी गतिविधियों के जरिए परीक्षा से जुड़े किसी कथित आर्थिक लेनदेन का रास्ता तो नहीं बन रहा था।
बिहार से लेकर दिल्ली और महाराष्ट्र तक जांच
मिथिलेश सिंह से जुड़े कथित कारोबारी नेटवर्क की जांच अब झारखंड तक सीमित नहीं रह गई है। सूत्रों के मुताबिक, CID को बिहार में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कारोबार और पटना के बिहटा इलाके में B.Ed कॉलेज से संबंध होने की जानकारी मिली है।
इसके अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई जगहों पर उसके कथित कारोबारी संपर्कों और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी भी जांच के दायरे में है।
CID की अलग-अलग टीमें इन राज्यों में जाकर जांच कर रही हैं और जरूरत के मुताबिक छापेमारी भी की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि मिथिलेश सिंह और उससे जुड़े लोगों का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
कंपनियों के रिकॉर्ड से पैसों के लेनदेन तक नजर
जांच एजेंसी अब सिर्फ कंपनियों के नाम और कारोबार तक सीमित नहीं है। बैंकिंग लेनदेन, कंपनी दस्तावेज, कारोबारी गतिविधियों और संबंधित लोगों के आपसी संपर्कों को भी जांचा जा रहा है।
CID यह पता करने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग कंपनियों के जरिए होने वाले आर्थिक लेनदेन और JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़े कथित लेनदेन के बीच कोई कड़ी है या नहीं।
अगर जांच में कोई वित्तीय कनेक्शन सामने आता है, तो यह पूरे मामले की दिशा को और बदल सकता है।
‘गुरु-शिष्य’ कनेक्शन पर भी CID की नजर
अभय तिवारी और मिथिलेश सिंह के बीच कथित नजदीकी भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल है। मिथिलेश सिंह को अभय तिवारी का ‘गुरु’ बताए जाने के दावे की भी CID अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या अभय तिवारी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था और क्या मिथिलेश सिंह उस नेटवर्क की अहम कड़ी हो सकता है।
कई राज्यों में पड़ताल से बढ़ सकता है दायरा
फिलहाल CID की जांच का फोकस सिर्फ JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। कारोबार, कंपनियां, संपत्तियां, बैंकिंग लेनदेन और अलग-अलग राज्यों में मौजूद संपर्क भी जांच का हिस्सा बन चुके हैं।
बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई जगहों पर चल रही पड़ताल के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी के हाथ कौन से नए सुराग लगते हैं। आने वाले दिनों में इस कथित नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, जांच पूरी होने तक सामने आ रहे कारोबारी संबंधों या संपर्कों को कथित गड़बड़ी में संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। CID की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।












