‘मेरे साथ सोओ, पास कर दूंगा’…सरकारी स्कूल में शिक्षक ही बने हैवान? 12 छात्राओं से दुष्कर्म के दावे ने खड़े किए बड़े सवाल, BPSC शिक्षक घेरे में!
बिहार में सरकारी स्कूल से जुड़ा सनसनीखेज दावा, 12 छात्राओं से दुष्कर्म के आरोप ने मचाई हलचल; BPSC पर भी उठे सवाल

Bihar News: बिहार के एक सरकारी स्कूल से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला दावा सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वायरल पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि BPSC से बहाल शिक्षकों ने 12 छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों को जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही तथ्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
वायरल तस्वीर में एक ओर एक डरी-सहमी युवती की तस्वीर दिखाई गई है, जबकि दूसरी ओर दो लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि सरकारी स्कूल के कुछ शिक्षकों पर छात्राओं के साथ यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
अतुल प्रसाद का पुराना ट्वीट भी चर्चा में
इसी विवाद के बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के पूर्व अध्यक्ष अतुल प्रसाद का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आ गया है। उनके नाम से वायरल पोस्ट में लिखा था— “तूफ़ान से कश्ती निकाल के लाए हैं, इस महफ़िल को सर ज़मीं से उठा के लाए हैं।”
बताया जाता है कि यह पोस्ट शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE) के आयोजन के संदर्भ में किया गया था। हालांकि, इस पुराने बयान को मौजूदा आरोपों से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा, जब तक किसी आधिकारिक जांच या विश्वसनीय रिपोर्ट में दोनों के बीच कोई संबंध सामने न आए।
BPSC से नियुक्त सभी शिक्षकों पर सवाल उठाना कितना सही?
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कुछ लोगों ने BPSC से नियुक्त शिक्षकों की योग्यता और चरित्र पर भी सवाल उठाए हैं। लेकिन किसी व्यक्ति विशेष पर लगे आरोप के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी अभ्यर्थियों को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
अगर वास्तव में किसी शिक्षक पर छात्राओं के साथ अपराध के आरोप लगे हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच, पीड़ितों की सुरक्षा और दोष सिद्ध होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
वायरल दावे की होगी जांच, तब सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वायरल पोस्ट में किए गए 12 छात्राओं से दुष्कर्म के दावे की वास्तविकता क्या है और मामला किस स्कूल या जिले से जुड़ा है? जब तक पुलिस, प्रशासन या किसी विश्वसनीय आधिकारिक स्रोत की ओर से इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक वायरल दावे को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।












