झारखंड में सोने की 2 खदानों समेत 5 का खेल खत्म! वर्षों से नहीं निकला एक भी खनिज, सरकार ने लीज रद्द कर फिर नीलामी के दिए आदेश
वन मंजूरी और जरूरी NOC के बीच अटकी थीं परियोजनाएं, परासी और पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक समेत आयरन ओर व ग्रेफाइट खदानें शामिल; अब नए सिरे से होगी नीलामी

रांची। झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़ा बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। वर्षों पहले नीलाम किए गए दो गोल्ड ब्लॉक, एक आयरन ओर ब्लॉक और दो ग्रेफाइट ब्लॉक का लीज आवंटन रद्द कर दिया गया है। इन खदानों में तय समय सीमा के भीतर उत्पादन शुरू नहीं हो सका था। अब राज्य सरकार ने इन खनिज ब्लॉकों की दोबारा नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
इन खदानों की शुरुआती नीलामी इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित MSTC के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, लीज रद्द करने से संबंधित अधिसूचना भी इसी प्लेटफॉर्म पर जारी की गई है। खान विभाग के संयुक्त सचिव जियाउल अंसारी की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
क्यों अटकी रहीं खदानें? सामने आया फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेच
सरकार के फैसले में मुख्य आधार निर्धारित अवधि के भीतर उत्पादन शुरू नहीं होना बताया गया है। हालांकि संबंधित कंपनियों की ओर से अलग पक्ष रखा गया है। कंपनी प्रतिनिधियों का कहना है कि परियोजनाओं में देरी उनकी वजह से नहीं हुई, बल्कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस, NOC और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं के कारण खनन शुरू नहीं हो पाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियां सरकार के इस फैसले को माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देने की तैयारी में हैं। यानी लीज रद्द होने के बाद अब मामला आगे कानूनी प्रक्रिया में भी जा सकता है।
2017 में नीलाम हुई थी परासी गोल्ड माइंस
रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र की परासी गोल्ड माइंस की नीलामी 1 नवंबर 2017 को हुई थी। इसे रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को जनवरी 2021 तक उत्पादन शुरू करना था, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी खनन शुरू नहीं हो सका।
कंपनी की ओर से देरी की वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलना बताई गई थी। बाद में राज्य सरकार ने इसका आवंटन रद्द कर दिया।
हालांकि, वन मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर रुंगटा माइंस की ओर से सरकार को दिए गए पत्रों में भी परासी गोल्ड ब्लॉक की लीज और उसकी वैधता अवधि बढ़ाने से जुड़े अनुरोध दर्ज हैं।
पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक भी नहीं हो सका शुरू
पश्चिमी सिंहभूम जिले का पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक भी उन परियोजनाओं में शामिल है जिनका आवंटन रद्द किया गया है। करीब 272.651 हेक्टेयर क्षेत्र वाले इस ब्लॉक की नीलामी 26 अक्टूबर 2016 को हुई थी और इसे मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था।
लेकिन निर्धारित अवधि में यहां भी खनन गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना में भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस की समस्या सामने आई थी।
सारंडा इलाके का भनगांव आयरन ओर ब्लॉक भी सूची में
पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी क्षेत्र में स्थित भनगांव आयरन ओर ब्लॉक भी लीज रद्द किए गए ब्लॉकों में शामिल है। यह क्षेत्र सारंडा वन प्रभाग के अंतर्गत आता है।
यह ब्लॉक वर्ष 2018 में राज्य सरकार की ई-नीलामी के जरिए साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को आवंटित हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस और अन्य जरूरी NOC नहीं मिलने के कारण खनन गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं।
ये 5 खदानें अब दोबारा नीलामी के लिए जाएंगी
| खनिज ब्लॉक | जिला/क्षेत्र | कंपनी | नीलामी |
|---|---|---|---|
| पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक | पश्चिमी सिंहभूम | मैथन इस्पात लिमिटेड | 26 अक्टूबर 2016 |
| परासी गोल्ड एंड एसोसिएटेड मिनरल्स | तमाड़ | रुंगटा माइंस लिमिटेड | 1 नवंबर 2017 |
| भनगांव आयरन ओर ब्लॉक | पश्चिमी सिंहभूम | साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड | 28 जून 2018 |
| डुलसुलमा ग्रेफाइट ब्लॉक | पलामू | टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि. | 1 मार्च 2019 |
| लेसलीगंज ग्रेफाइट ब्लॉक | पलामू | टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि. | 1 अगस्त 2018 |
इन पांचों ब्लॉकों के आवंटन रद्द होने के बाद अब इन्हें नए सिरे से नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री की जून 2026 की समीक्षा में भी लंबे समय से निष्क्रिय खनिज ब्लॉकों को निरस्त कर दोबारा ऑक्शन करने और राज्य के राजस्व का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश दिया गया था।
अब नजर नई नीलामी पर
सरकार का अगला कदम इन खनिज ब्लॉकों को दोबारा नीलामी के लिए लाना है। इससे वर्षों से अटकी इन परियोजनाओं को नए सिरे से आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, पहले आवंटन पाने वाली कंपनियों की ओर से फैसले को चुनौती देने की बात सामने आने के कारण आगे की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।












