शिक्षक प्रोन्नति मामला : शिक्षक मोर्चा ने सरकार को दिया विभागीय पत्र 770 वापस लेने का अल्टीमेटम, लगाया ये आरोप, पढ़िए क्यों नाराज है शिक्षक?

राँची । झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने आज स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार के सचिव के रवि कुमार जी के द्वारा विभागीय पत्रांक 770 दिनांक 5 अक्टूबर 2023 के माध्यम से राज्य के सभी उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधीक्षकों को दिए गए मार्गदर्शन पर आपत्ति दर्ज किया है।

मोर्चा के द्वारा इस सन्दर्भ में माननीय मुख्यमंत्री, संसदीय कार्य मंत्री, वित्त मंत्री, सचिव,कार्मिक एवं राजभाषा सुधार विभाग के साथ साथ निदेशक प्राथमिक शिक्षा को ज्ञापन देकर राज्य सरकार के द्वारा जारी किए गए संकल्पों के अनुरूप विभागीय पत्रांक 619 (विधि) दिनांक 26/08/2021, विभागीय पत्रांक 714 (विधि) दिनांक 29/0 8/ 2023 एवं झारखंड उच्च न्यायालय के WP(S) 4115 / 2021 के आदेशों एवं दिशा निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद, विजय बहादुर सिंह एवं प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने कहा कि राज्य के प्राथमिक शिक्षकों को उनके सेवा शर्तों के अनुरूप प्रत्येक वर्ष के दिसंबर माह में ग्रेडेशन लिस्ट एवं जिला रोस्टर तैयार कर अगले वर्ष के अप्रैल माह में शिक्षकों को प्रोन्नति देने का प्रावधान किया गया है परंतु विभाग विगत 30 वर्षों से प्रोन्नति मामले में तरह-तरह के हथकंडे अपना कर शिक्षकों को प्रोन्नति से वंचित करते आ रही है परिणाम स्वरूप आज राज्य के तमाम विद्यालय प्रधानाध्यापक विहीन हो चले हैं जिसका प्रतिकूल प्रभाव राज्य के शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रही है, इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेवार राज्य का शिक्षा विभाग है न कि शिक्षक।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

उन्होंने आगे कहा कि विभाग वरीय शिक्षकों को अपने ही संकल्पों के विरुद्ध दिशा निर्देश जारी कर उन्हें कनीय शिक्षक से भी कनीय बना कर शिक्षकों को आपस में वरीय एवं कनीय का भेदभाव कर प्रोन्नति से वंचित कर रही है जिस कारण प्रतिवर्ष हजारों शिक्षक प्रोन्नति के बिना अपने बेसिक पद से ही सेवानिवृत्त हो गये और आगे भी होते रहेंगें।

विभाग के ऐसे तानाशाही कार्यशैली एवं मंशा से प्रतीत होता है कि राज्य के सभी सरकारी विद्यालय मात्र एक सुलभ सेवा केंद्र के रूप में विकसित हो जहां राज्य के गरीब बच्चों को शिक्षा में गुणवत्ता के नाम पर सिर्फ नए नए प्रयोग किया जाता रहे और बच्चे सिर्फ मध्यान्ह भोजन एवं राज्य के अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाता रहे और विद्यालय के बचे खुचे शिक्षक रिपोर्टिंग कार्य के साथ तमाम गैर शैक्षणिक कार्य का संपादन करते रहें।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

राज्य के विद्यालयों में छात्र अनुपात में शिक्षक एवं प्रयाप्त भौतिक संसाधन आदि की घोर कमी है। यद्यपि विभाग शिक्षा में गुणवत्ता के नाम पर तरह-तरह के एन जी ओ के माध्यम से शिक्षा बजट की बहुत बड़ी राशि खर्च कर रही है बावजूद इसके शिक्षा विभाग शिक्षकों को उनके सेवा शर्तों के अनुरूप न ही नई नियुक्ति कर पा रही है और न ही प्रोन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रही है जो विभागीय उदासीनता का परिचायक है। इस सन्दर्भ में मोर्चा विभाग को आगाह करते हुए शिक्षकों के सेवा शर्तों के अनुरूप नियमसम्मत अविलंब शिक्षकों को सभी ग्रेड में शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक विहीन हो चुके राज्य के विद्यालयों को प्रधानाध्यापक देकर शिक्षा हित मे कार्य करने की मांग करती है।

आज के प्रतिनिधिमंडल में मोर्चा के संयोजक विजय बहादुर सिंह, अमीन अहमद, प्रवक्ता अरुण कुमार दास, मक़सूद ज़फ़र हादी, सुमेश कुमार् मिश्रा, राकेश श्रीवास्तव, मो० फखरूद्दीन, कृष्णा झा, संजय कुमार, अजय कुमार, पंकज दुबे, संजय झा, ओम प्रकाश आदि शिक्षक मुख्य रूप से शामिल थे।

Related Articles

close