टीकाकरण के नाम पर धनबाद में “हो गया खेला”…4 माह में ही उड़ा डाले पौने पांच करोड़ …80 लाख तो दावत में ही कर डाले खर्च

  • टीकाकरण लक्ष्य के पीछे दावत में उड़ाया 72 लाख
  • कईयों को पानी नहीं, पर ग्लास में 27 लाख खर्च
  • वैक्सीन लाने-लेजाने पर भी दिल खोलकर खर्च
  • तोपचांची में सेंटर से भीड़ हटाने में 6.50 लाख खर्च

धनबाद। कोरोना काल में कईयों ने आपदा में अवसर ढूंढ लिया….और स्वास्थ्य विभाग ने तो इस आपदा को सुनहरे अवसर के तौर पर भुनाया। अब धनबाद को ही देख लीजिये, यहां स्वास्थ्य विभाग ने इस कदर कर्मियों पर दरियादिली लुटायी कि 4 माह में 5 करोड़ खर्च कर डाले। हद तो ये है कि करीब 50 लाख रूपये तो सिर्फ खाने में खर्च हुए, उस पर भी कमाल ये कि 27 लाख रुपये सिर्फ डिस्पोजल ग्लास पर खर्च किये गये। मतलब खाना और पीना मिला लिया जाये तो करीब 80 लाख रूपये इन दोनों पर खर्च हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना से बचाव के लिए अप्रैल से लेकर अब तक जिले के आठ प्रखंड में 6.5 लाख डोज दिये गये। स्वास्थ्य विभाग ने इस दौरान वैक्सीन पर हुए खर्च तो दिल खोलकर किये ही, कर्मचारियों की तीमारदारी में करीब 75-80 लाख रुपये खर्च कर दिये। अब इतने खर्च कैसे हुए, कहां हुए, किसने कितना खाया, ये सब एक बड़े संदेह की तरफ इशारा कर रहा है। विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 8 प्रखंडों में टीकाकरण की व्यवस्था के नाम पर 4.50 करोड़ रूपये खर्च किये गये।

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ना खाना ना पानी फिर लाखों का बिल आया कहाँ से

खाने और पीने के ग्लास पर जिस तरह से विभाग ने खर्च किया है, वो वाकई में चौकाने वाला है। खानपान पर 70 लाख से ज्यादा खर्च किये गये, जिसमें 50 लाख खाने पर तो 27 लाख सिर्फ पीने के ग्लास पर खर्च हो गये। ये भी तब जब पूरे वैक्सीनेशन के दौरान कर्मचारी इस बात को लेकर हायतौबा मचाते रहे कि किसी को खाने का पैकेट नहीं मिला, किसी को पीने का पानी नसीब नहीं हुआ। अगर वाकई में ऐसा हुआ है?…कई स्वास्थ्यकर्मी भूखे-प्यासे रहे, तो फिर लाखों का खाना हजम किसने किया। कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान खर्च हुए 4.75 करोड़ रूपये अब भुगतान करने को कहा गया है।

करोड़ों खर्च के बावजूद, आंकड़ों फिसड्डी

4.75 करोड़ रूपये खर्च के बावजूद जिले में कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी धीमी रही है। 12-14 वर्ष के 68 प्रतिशत और 15-17 वर्ष के 39 प्रतिशत बच्चों को पहला डोज नहीं लगा है। कईयों को तो प्री कॉशन डोज भी नहीं लग पाया है। ऐसे में तो सवाल उठने लाजिमी है कि दिल खोलकर पैसा लुटाने के बावजूद नतीजा इतना पीछे क्यों?

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टीकाकरण के लिए लोगों को जुटाने में 28 लाख लाख खर्च

बिल ये बता रहा है कि बलियापुर, गोबिंदपुर, झरिया में लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक करने में ही करीब 28 लाख रूपये खर्च किये गये हैं। झरिया में 21.48 लाख, बलियापुर में ये आंकड़ा 5 लाख से ज्यादा और गोबिदंपुर में 1.25 लाख खर्च हुआ है। तोपचांची में टीकाकरण सेंटर पर भीड़ नियंत्रण में 6.50 लाख से ज्यादा खर्च किये गये हैं।

टीका पहुंचाने में 9.50 लाख से ज्यादा खर्च

बिल के मुताबिक वैक्सीन पहुंचाने में सबसे ज्यादा खर्च निरसा में 3.15 लाख, बिलासपुर में 2.98 लाख, तोपचांची में 1.10 लाख, टुंडी में 1.50 लाख और गोबिंदपुर सेंटर में पहुंचाने पर 85 हजार रुपये खर्च हुए। टीकाकरण के दौरान डिस्पोजल और अन्य खर्च भी 2 लाख से ज्यादा हुआ है। पैन, बैग और कॉटन के नाम पर भी 8.80 लाख खर्च हुआ है। एईएफआई व अन्य किट पर बलियापुर, गोबिंदपुर, धनबाद, तोपचांची और टुंडी में 1 लाख 32 हजार रुपये खर्च हुए हैं।

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