वेतन-भत्ता बढ़ेगा: झारखंड में मुख्यमंत्री, मंत्री सहित इन माननीयों का वेतन-भत्ता बढ़ेगा, 25 से 50 फीसदी तक की होगी बढ़ोत्तरी, जानिये कितना मिलेगा वेतन

रांची। झारखंड में माननीयों का वेतन भत्ता बढ़ने वाला है। वेतन, भत्ता और सुविधाओं में बढोत्तरी करने वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्ते में 25 से 50 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के वेतन को 80 हजार से बढ़ाकर एक लाख करने और मंत्रियों का वेतन 65 हजार से बढ़ाकर 85 हजार रुपए करने का प्रस्ताव दिया गया है।
साल 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ था। तब से ये आठवां मौका है, जब इन जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्ते में बढ़ोतरी की तैयारी की गई है। इससे पहले साल 2015 में तत्कालीन सीएम रघुवर दास के शासनकाल में सरकार ने इनके वेतन-भत्ते में बढ़ोतरी की थी। मुख्यमंत्री को अभी वेतन, क्षेत्रीय भत्ता और सत्कार भत्ता मिलाकर 2.30 लाख रुपये मिलते हैं। इसे बढ़ाकर 2.65 लाख रुपये प्रति माह करने की योजना है। आवास के लिए भी 50 लाख तक का लोन 4 फीसदी ब्याज पर मिलेगा। इसके साथ एक्यूपमेंट और घर आदि अन्य की सुविधा मिलेगा।
वहीं प्रभारी भत्ता राज्य के अंदर 2000 से बढ़ाकर 3000 व राज्य के बाहर 2500 रुपए प्रतिदिन से बढ़ाकर 4000 करने का प्रस्ताव दिया गया है। उसी तरह से CM व मंत्रियों का रिजनल एलाउंस 80 हजार से बढ़ाकर 95 हजार रुपए करने की अनुशंसा की गयी है। उसी तरह से मुख्यमंत्री का सत्कार भत्ता 60,000 से बढ़ाकर 70,000 और मंत्रियों के लिए 45,000 से बढ़ाकर 55,000 रुपए करने का प्रस्ताव है।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष की सैलरी भी 78 हजार से बढ़ाकर 98 हजार करने और प्रभारी भत्ता को बढ़ाकर 3 हजार और 4 हजार, क्षेत्रीय भत्ता 80 हजार रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 95 हजार और सत्कार भत्ता 60 हजार से बढ़ाकर 70 हजार करने की अनुशंसा की गयी है।
उसी तरह विपक्ष के नेता को 65 हजार से बढ़ाकर 85 हजार वेतन देने, क्षेत्रीय भत्ता 80 हजार से बढ़ाकर 95 हजार, सत्कार भत्ता 45 हजार की जगह 55 हजार और प्रभारी भत्ता 3 हजार और 4 हजार करने की बात कही गयी है।
उसी तरह से मुख्य सचेतक के 55 हजार रुपए से बढ़ाकर 75 हजार रुपए वेतन, उप मुख्य सचेतक 50 हजार से बढ़ाकर 70 हजार वेतन देने, सचेतक को 40 हजार रुपए की जगह 60 हजार वेतन देने का प्रस्ताव है। उसी तरह से सत्कार भत्ता 45 हजार की जगह 55 हजार, क्षेत्रीय भत्ता 55 हजार की जगह 65 हजार करने का प्रस्ताव है।












