झारखंड: 2300 पुलिसकर्मियों का क्या होगा? आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं, पुलिसकर्मी भी पीछे हटने को तैयार नहीं

रांची। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब पुलिसकर्मियों को ही पुलिसकर्मियों से झूमाझटकी करनी पड़ रही है। दरअसल नियमितिकरण सहित अन्य मांगों को लेकर झारखंड के सहायक पुलिसकर्मी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने राजभवन घेराव की भी कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें मोरहाबादी मैदान में ही रोक दिया। इधर सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधा है। दरअसल 2300 सहायक पुलिसकर्मियों ने विभिन्न मांगों को लेकर गत दो जुलाई से मोरहाबादी मैदान स्टेज के समीप अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।

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झारखंड के सहायक पुलिसकर्मियों का 10 अगस्त को अनुबंध समाप्त हो जायेगा। इसके बाद उनका अनुबंध रिनुवल होगा या नहीं, यह भी क्लियर नहीं है। ऐसे मं भविष्य को लेकर सहायक पुलिसकर्मी चिंतित हैं। इससे पहले भी मानदेय बढ़ाने के लिए वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में उन्होंने आंदोलन किया था, जिसके बाद उन्हें आश्वासन मिला था, उनके स्थायीकरण पर सरकार विचार करेगी। लेकिन लेकिन चार साल बीतने के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं हुई है। इससे सहायक पुलिसकर्मियों में आक्रोश है।

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पिछले आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि ने उन्हें आश्वासन ही नहीं, मांग पूरी करने के लिए शपथ पत्र पर हस्ताक्षर भी किया था। आपको बता दें कि नक्सलियों के संबंध में सूचना देने के लिए सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली की गयी थी लेकिन उनसे पुलिस का सारा काम जैसे विधि-व्यवस्था, ट्रैफिक, थाना ड्यूटी, चुनाव ड्यूटी आदि में लगाया जाने लगा। सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली राज्य के 12 जिला गढ़वा, पलामू, लातेहार, चतरा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम, दुमका एवं गिरिडीह में हुई थी। वर्तमान में हर जिला में सहायक पुलिसकर्मी कार्यरत हैं।

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2300 सहायक पुलिसकर्मी पिछले सात साल से मात्र 10 हजार रुपये के मानदेय पर नौकरी कर रहे हैं। इनमें कई सहायक पुलिसकर्मियों की दूसरी जगह पर नौकरी करने की उम्र भी समाप्त हो गयी है। ऐसे में सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता देख, सहायक पुलिसकर्मियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। आज पुलिसकर्मियों के आंदोलन का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजर होगी।

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