रूपी के ढेर होते ही जंगल में फैला खौफ… अचानक हथियार डालकर सामने आया दासरू, खुल सकती हैं अंदर की परतें

कांकेर। बस्तर के जंगलों में हाल ही में हुई मुठभेड़ के बाद हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। तेलंगाना कैडर की नक्सली रूपी के मारे जाने के बाद जहां संगठन में खामोशी छाई हुई है, वहीं उसी के बीच एक ऐसा कदम सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तर बस्तर इलाके में परतापुर एरिया कमेटी से जुड़ा सक्रिय नक्सली दासरू अचानक सामने आया और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर ऐसे समय में हुआ है, जब जंगल के भीतर दहशत और असमंजस का माहौल बताया जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक दासरू आमाबेड़ा थाना पहुंचा, जहां उसने बिना किसी प्रतिरोध के हथियार डाल दिए और मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेछा ने इस आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए इसे नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि हाल की मुठभेड़ों ने नक्सल संगठन की आंतरिक स्थिति को प्रभावित किया है, जिसके चलते अब कई सदस्य खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में दासरू का यह कदम आने वाले दिनों में और सरेंडर की संभावना को भी संकेत दे रहा है।

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सरकार की पुनर्वास नीति के तहत दासरू को तत्काल 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसके साथ ही आने वाले तीन वर्षों तक हर महीने 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड, निःशुल्क आवास और भोजन, कौशल प्रशिक्षण, कृषि भूमि और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक सरेंडर है या फिर जंगल के भीतर कोई बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है। रूपी के मारे जाने के बाद जो खामोशी पसरी है, उसके पीछे क्या और भी राज छिपे हैं—यह आने वाला समय ही बताएगा।

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