बोकारो का चर्चित रेप कांड: 27 साल पहले अफसर की बेटी से रेप, 24 साल से आरोपी जेल में, हाईकोर्ट ने कहा, समय से पहले रिहाई नहीं 

1999 बोकारो गैंगरेप मामले के दोषी युनुस अंसारी की समयपूर्व रिहाई की याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। वहीं सास की हत्या के मामले में बहू फूलो देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने साल 1999 के चर्चित बोकारो सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषी युनुस अंसारी को राहत नहीं दिया है। जस्टिस आर. मुखोपाध्याय की अदालत ने उसकी समयपूर्व (प्रीमेच्योर) रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उसे राहत नहीं दी जा सकती। युनुस ने लंबे वक्त से जेल में रहने का हवाला देकर रिहाई की मांग की थी।

24 साल से ज्यादा जेल में रहने का दिया था हवाला

रेप मामले में दोषी युनुस अंसारी ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 24 वर्ष 2 माह से अधिक समय से जेल में है, इसलिए उसे समयपूर्व रिहा किया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने उसकी दलील स्वीकार नहीं की और याचिका खारिज कर दी।

1999 के चर्चित गैंगरेप कांड में हुई थी उम्रकैद

यह मामला 5 अप्रैल 1999 का है। बोकारो स्टील प्लांट के एक वरिष्ठ अधिकारी की 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी का शाम के समय अपहरण कर लिया गया था। आरोपियों ने उसे बोकारो के भर्रा क्षेत्र की झाड़ियों में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उसे मृत समझकर वहीं छोड़ दिया गया था।इस अमानवीय घटना के बाद पीड़िता गहरे मानसिक आघात में चली गई थी। न्याय की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद कुछ वर्षों पश्चात उसका निधन हो गया।

21 दोषियों को मिली थी उम्रकैद

मई 2004 में बोकारो की निचली अदालत ने इस मामले में 21 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में वर्ष 2015 में झारखंड हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद 14 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। आपको बता दें कि 1999 में हुई रेप की वारदात उस वक्त के सबसे जघन्य घटनाओं में से एक था। जहां लड़की को उसके घर से बाहर किडनैप कर लिया गया था।

बाद में कई लड़कों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। ये मामला उस वक्त सदन से लेकर सड़क तक गूंजा था।1999 बोकारो गैंगरेप मामले के दोषी युनुस अंसारी की समयपूर्व रिहाई की याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। वहीं सास की हत्या के मामले में बहू फूलो देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

 

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