कीर्ति चक्र लेते शहीद की पत्नी के आंसू छलके: Love at first sight था मेरा अंशुमान… शहीद कैप्टन की पत्नी की बातें रुला देगी

Smriti Singh, wife of martyr Captain Anshuman Singh: आंखें नम…हाथ जुड़े हुए और विस्मित चेहरा..शहीद पति के शौर्य के प्रमाण कीर्ति चक्र को लेने के जब पत्नी स्मृति सिंह खड़ी हुई, तो पूरा सदन शून्य हो गया। स्मृति सिंह उसी वीर कैप्टन अंशुमान की पत्नी थी, जिन्होंने सेना के लिए रखे गये जीवन रक्षक उपकरण और दवाईयों को सुरक्षित निकालते वक्त टेंट में लगी आग में जलकर शहीद हो गये। कैप्टन अंशुमान सिंह के इस अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत दिए गए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

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कीर्ति चक्र भारत का दूसरा सबसे बड़ा शौर्य पुरस्कार है। कैप्टन सिंह को यह सम्मान सियाचिन ग्लेशियर पर आर्मी के सामान जमा करने की जगह पर लगी आग में लोगों की जान बचाने और जरूरी मेडिकल उपकरणों को सुरक्षित रखने की कोशिश में जान गंवाने के लिए दिया गया। कैप्टन सिंह 26 पंजाब रेजिमेंट के मेडिकल ऑफिसर के तौर पर तैनात थे। उनकी पत्नी ने रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो में बताया कि 19 जुलाई, 2023 को उनके पति की मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले उनकी फोन पर लंबी बात हुई थी। वो इस बारे में बात कर रहे थे कि अगले 50 साल उनका जीवन कैसा होगा। वो घर बनाएंगे, उनके बच्चे होंगे… लेकिन अगले ही दिन उन्हें ये खबर मिली कि कैप्टन सिंह नहीं रहे।

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शहादत के 6 महीने पहले 10 फरवरी, 2023 को उनकी शादी हुई थी। पत्नी स्मृति सिंह पठानकोट की रहने वाली हैं।19 जुलाई, 2023 को सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना के टेंट में आग लग गई थी। कई जवान आग में फंस गए। अपनों को आग से घिरा देख रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह खुद को नहीं रोक सके। उन्हें बचाने की कोशिश में कैप्टन अंशुमान शहीद हो गए। वे 15 दिन पहले ही सियाचिन गए थे।

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कैप्टन सिंह की पत्नी ने बताई कहानी

वीडियो में, कैप्टन सिंह के साथ अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए स्मृति कहती हैं, “हम कॉलेज के पहले दिन मिले थे। मैं अतिश्योक्ति नहीं करना चाहती, लेकिन यह पहली नजर में प्यार था। एक महीने के बाद, उनका चयन आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (AFMC) में हो गया। हम एक इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले थे, लेकिन फिर उनका चयन मेडिकल कॉलेज के लिए हो गया। बहुत ही इंटेलिजेंट थे। हमारी मुलाकात के सिर्फ एक महीने बाद, आठ सालों तक लॉग डिस्टेंस रिलेशनशिप में रहे। फिर हमने शादी करने का फैसला किया। शादी के दो महीने के अंदर ही उनकी तैनाती सियाचिन में हो गई।”

स्मृति ने कहा- कैप्टन अंशुमान बहुत सक्षम थे। वे अक्सर कहा करते थे, मैं अपने सीने पर गोली खाकर मरना चाहता हूं। मैं आम आदमी की तरह नहीं मरना चाहता, जिसे कोई जान ही न पाए।स्मृति ने कहा, इंजीनियरिंग कॉलेज के पहले दिन हमारी मुलाकात हुई थी। यह पहली नजर का प्यार था। एक महीना ही बीता था कि उनका चयन एएफएमसी में हो गया। वे सुपर इंटेलिजेंट शख्स थे। हम सिर्फ एक महीना ही रूबरू मिले। फिर आठ साल तक दूरी रही, लेकिन रिश्ता बना रहा।

इसके बाद सोचा कि अब शादी कर लेनी चाहिए। इसलिए फरवरी, 2023 में शादी कर ली। दुर्भाग्य से शादी के दो महीने बाद ही उनकी सियाचिन में पोस्टिंग हो गई।18 जुलाई, 2023 को हमारी लंबी बातचीत हुई थी कि अगले 50 साल में हमारी जिंदगी कैसी होगी। अपना घर होगा। हमारे बच्चे होंगे …और भी बहुत कुछ। 19 जुलाई की सुबह मैं एक फाेन कॉल से उठी। उधर से आवाज आई…कैप्टन अंशुमान सिंह शहीद हो गए।

अगले 7-8 घंटे भरोसा ही नहीं हुआ कि ऐसा कुछ हुआ है। मैं यह मानने के लिए तैयार ही नहीं थी कि मेरे पति इस दुनिया में नहीं रहे। आज तक मैं इस दुख से उबरने की कोशिश कर रही हूं… यह सोचकर कि शायद यह सच नहीं है। अब जब मेरे हाथ में कीर्ति चक्र है, तो मुझे एहसास हुआ कि यह सच है।लेकिन यह ठीक है। वे एक हीरो हैं। हम अपने जीवन को थोड़ा मैनेज कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने बहुत कुछ मैनेज किया था। उन्होंने अपना जीवन और परिवार त्याग दिया ताकि अन्य तीन परिवारों को बचाया जा सके।

स्मृति ने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए कहा, “18 जुलाई को, हमारी एक लंबी बातचीत हुई थी कि अगले 50 सालों में हमारा जीवन कैसा होगा। हम एक घर बनाएंगे, हमारे बच्चे होंगे… 19 जुलाई की सुबह, मुझे फोन आया कि वह अब नहीं रहे। अगले 7-8 घंटों तक, हम यह मानने के लिए तैयार नहीं थे कि ऐसा कुछ हुआ है। अब मेरे हाथ में कीर्ति चक्र है, तो शायद यह सच है। ठीक है, वह एक हीरो हैं। हम अपना जीवन संभाल सकते हैं। लेकिन उन्होंने तीन अन्य परिवारों, अपने सेना के परिवार को बचाने के लिए अपनी जान दे दी।” कैप्टन सिंह का अंतिम संस्कार 22 जुलाई, 2023 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भागलपुर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया था।

पढ़ाई के बाद अंशुमान का चयन आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे में हुआ था। वहां से MBBS करने के बाद कैप्टन अंशुमान सिंह सेना के मेडिकल कोर में शामिल हुए थे। पत्नी स्मृति पेशे से इंजीनियर हैं और उनके माता-पिता स्कूल के प्रधानाचार्य हैं। आगरा मिलिट्री हॉस्पिटल में ट्रेनिंग के बाद वहीं अंशुमान की तैनाती हो गई थी।कश्मीर के पुंछ सेक्टर में तैनात एक बटालियन के वह मेडिकल आफिसर बने। वहां से 15 दिन पहले ही सियाचिन गए थे। जहां वो शहीद हो गये।

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