झारखंड शिक्षक भर्ती : माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई, याचिका को PIL से जोड़ने का आदेश, फिलहाल अभ्यर्थियों को राहत नहीं

Jharkhand Teacher Recruitment: Hearing in High Court on Secondary Acharya appointment dispute, order to link the petition with PIL, no relief for candidates at present

झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद में दायर अर्चना कुमारी एवं अन्य की याचिका को पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ टैग कर दिया है। कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया है।
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रांची/28.4.26। माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से जुड़े विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। मामले में अर्चना कुमारी एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने इसे पहले से लंबित एक जनहित याचिका के साथ संलग्न (टैग) करने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई।

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याचिका पर सुनवाई के दौरान JSSC की ओर से प्रस्तुत पक्ष को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पाया कि इस याचिका में उठाए गए मुद्दे पहले से ही एक जनहित याचिका (PIL संख्या 2375/2024) में विचाराधीन हैं। ऐसे में समान प्रकृति के मामलों की अलग-अलग पीठों में सुनवाई उचित नहीं मानी गई। इसी आधार पर कोर्ट ने मामले को खंडपीठ में स्थानांतरित करते हुए संबंधित PIL के साथ जोड़ दिया।

आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि इस मामले से जुड़े मूल मुद्दे पहले से ही तालेबर महतो द्वारा दायर जनहित याचिका में उठाए गए हैं, जिसकी सुनवाई खंडपीठ कर रही है और वह इसकी मॉनिटरिंग भी कर रही है। ऐसे में दो समानांतर मामलों की सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि उन्हें मॉडल आंसर शीट देखने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे उस पर आपत्ति दर्ज कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बिना दोषी अभ्यर्थियों और संबंधित परीक्षा केंद्रों की पहचान किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका कहना था कि वे किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों में शामिल नहीं थे, फिर भी उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।

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वहीं, आयोग की ओर से बताया गया कि इस परीक्षा में 25 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, लेकिन 2819 अभ्यर्थियों के परीक्षा टर्मिनल में बाहरी हस्तक्षेप के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर आयोग ने इन अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा का निर्णय लिया है।कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अब इस मामले की आगे की सुनवाई खंडपीठ में संबंधित जनहित याचिका के साथ होगी।

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