IAS की मर्डर केस में उलझे: मर्डर केस में उलझते जा रहे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, कोर्ट ने बढ़ाई मुश्किलें, जानें पूरा मामला

मुजफ्फरपुर। शिक्षा विभाग के चर्चित अफसर IAS केके पाठक की मुश्किलें बढ़ सकती है। डेढ़ साल पुराने मौत मामले की जांच शुरू हो गयी है। आरोप था कि कि प्रमुख सचिव रहते उन्होंने एक अधिकारी को इतना डांटा था कि उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गयी थी। इस मामले में परिजनों ने गंभीर आरोप लगाये थे। मालूम हो कि केके पाठक वर्तमान में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं और अपने कड़े तेवर के कारण वो फिर इन दिनों सुर्खियों में हैं.
दरअसल बिहार सरकार में पूर्व उत्पाद आयुक्त रहे केके पाठक और वर्तमान गृह सचिव जितेंद्र श्रीवास्तव के अलावा कई अधिकारी संकट में हैं। इनमें विशेष सचिव विधि बिहार पटना ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और प्रभुनाथ सिंह निदेशक अभियोजन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का परिवाद दायर हुआ है। इस परिवाद को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट में दायर किया गया है।
मामला करीब डेढ़ साल पुराना है. 23 जनवरी 2022 को जब के के पाठक बिहार में उत्पाद एवम मद्य निषेध विभाग के मुख्य सचिव हुआ करते थे उस दौरान एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग के दौरान मुजफ्फरपुर उत्पाद न्यायालय के स्पेशल पीपी बजरंग प्रसाद सिंह को उन्होंने काफी बुरा भला कह डाला था. मीटिंग अटेंड करने की रात ही बजरंग प्रसाद सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने सभी आरोपियों पर दर्ज परिवाद में मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए परिवाद दायर किया था। अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि 29 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस और शराब माफियाओं की गठजोड़ को लेकर बातचीत हुई। इसमें आरोपी सभी अधिकारियों ने बजरंग प्रसाद को टॉर्चर किया। सुधीर ओझा के मुताबिक अभियोजक बजरंग प्रसाद को काफी जलील किया गया। उनके साथ गाली-गलौज तक की गई। मानसिक रूप से उन्हें टॉर्चर किया गया। इससे बजरंग प्रसाद काफी तनाव में चले गए और उसी रात उनकी मृत्यु हो गई। जिसे लेकर उन्होंने यह परिवाद दायर किया।











